शोध का खुलासा- वाहनों से निकलने वाले धुएं से बढ़ रहें हैं गर्भपात के मामले

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चैतन्य भारत न्यूज

शहर में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। इतना ही नहीं बल्कि हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक, वाहनों से निकलने वाले काले धुएं से दुनियाभर में गर्भपात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बेल्जियम के हैसेल्ट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर टीम नवारोट का ने इस बात का दावा किया कि, प्रदूषित हवा के कारण सांस लेने के दौरान गर्भवती महिलाओं के गर्भनाल में प्रदुषण के कण बड़ी मात्रा में प्रवेश कर जाते हैं, जिसकी वजह से भ्रूण का विकास बाधित होता है। कभी-कभी तो स्थिति ऐसी हो जाती है कि बच्चा प्रीमैच्योर जन्म लेता है या फिर महिलाओं को गर्भपात तक विवश होना पड़ता है।



शोध के मुताबिक, जन्मे बच्चे का वजन कम होने का भी यह एक महत्वपूर्ण कारक है। इसके अलावा आगे जाकर महिलाओं का शारीरिक और मानसिक विकास भी कमजोर पड़ जाता है। इतना ही नहीं बल्कि कई बार तो महिलाएं अवसादग्रस्त भी हो जाती है। बता दें सांस की तकलीफ के कारण मौतें दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में ही होती है।

बच्चे के विकास पर गहरा असर

शोधकर्ताओं के मुताबिक, हवा में मौजूद खतरनाक रसायनिक तत्व जैसे कार्बन मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। वहीं डॉक्टर्स के मुताबिक, गर्भपात का एक कारण वायु प्रदुषण भी है। वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदुषण महिलाओं में गर्भपात या गर्भ में पल रहे बच्चे की आने वाली जिंदगी के लिए खतरनाक होते हैं।

प्रदूषण से महिलाओं में बढ़ते हैं कई विकार

शोध के मुताबिक, प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से स्पर्म काउंट कम होते हैं। साथ ही महिलाओं का गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा समय से पहले डिलीवरी में इसका एक मुख्य कारण है। अगर कोई महिला लंबे समय या लगातार प्रदूषित वातावरण में रहती है तो उसमें चिड़चिड़ापन, मानसिक असंतुलन, हीमोग्लोबिन की कमी जैसे समस्याएं बढ़ती हैं।

25 फीसदी महिलाओं का हो रहा है गर्भपात

शोधकर्ताओं के मुताबिक, आज की जीवनशैली व वातावरण की वजह से गर्भवती महिलाओं में से करीब 25 फीसदी को मिसकरेज (गर्भपात) हो रहा है। बता दें 15 साल पहले यह आंकड़ा 10 प्रतिशत के आसपास था। डॉक्टर्स का कहना है कि, गर्भपात होने के मुख्य कारणों में बदलती जीवनशैली और अनचाहे गर्भ के साथ-साथ प्रदूषण भी शामिल है।

प्रोफेसर टीम नवारोट का कहना है कि, महिलाओं के लिए गर्भ का समय सबसे अहम होता है। भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए हमें इन जोखिम को कम करना होगा। लोगों को भी व्यस्त सड़कों पर चलने-फिरने से परहेज करना चाहिए।

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