वर्षा ऋतु के आगमन में मनाई जाने वाली ‘मिथुन संक्रांति’ आज, जानिए इस पर्व का महत्व और पूजा विधि

mithuna raja, sankranti festival

चैतन्य भारत न्यूज

संक्रांति का पर्व सूर्य देव की आराधना के लिए होता है। सालभर में कुल 12 संक्रांति आती हैं। इन्हीं में से एक है मिथुन संक्रांति। इस दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस वर्ष मिथुन संक्रांति 15 जून को है। मिथुन संक्रांति हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में से एक है।

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मिथुन संक्रांति से सौरमंडल में बड़ा बदलाव आता है। दरअसल, मिथुन संक्रांति के आने के बाद से ही वर्षा ऋतु शुरू हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। मिथुन संक्रांति पर दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

मिथुन संक्राति की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • स्नान करने के पश्चात सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • फिर सिलबट्टे की भूदेवी के रूप में पूजा करें।
  • मिथुन संक्रांति पर विशेष रूप से पोडा-पीठा नाम की मिठाई बनाई जाती है।
  • पूजा करने के बाद गरीबों को दान दिया जाता है।
  • मिथुन संक्रांति के दिन घर के पूर्वजों को भी श्रद्धांजलि देनी चाहिए।
  • इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

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ओडिशा में मिथुन संक्रांति का पर्व 4 दिनों तक बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यहां पहली बारिश का स्वागत भी जोरों-शोरों से किया जाता है। ओडिशा में मिथुन संक्रांति को राजा परबा भी कहा जाता है। किसानों के लिए यह दिन धरती मां को धन्यवाद करने का होता है। इस पर्व के दौरान किसी प्रकार का कृषि कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान कई सारी प्रतियोगिता होती है जो काफी रोमांचक होती है।

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