15-19 साल की 40% महिलाएं और 20-24 साल की 30% महिलाएं प्रेग्नेंसी में होती हैं कमजोर, बच्चे पर भी पड़ता है असर

pregnant

चैतन्य भारत न्यूज

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, यूनिसेफ और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि भारत में 15 से 19 साल की 40% और 20-24 साल की 30% शादीशुदा महिलाएं गर्भधारण के समय शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं। इसका गंभीर असर प्रेग्नेंट महिला और होने वाले नवजात पर भी पड़ता है।

यह अध्ययन 26 हजार 623 महिलाओं पर हुआ। इससे यह सामने आया कि 15 से 19 आयु वर्ग में प्रेग्नेंट महिलाओं में से 35% महिलाएं दुबली-पतली हैं। इनमें से 5% तो बहुत ज्यादा दुबली हैं और 11% का वजन सामान्य से ज्यादा पाया गया। वहीं 20 से 24 आयु वर्ग में 26.3% गर्भवती दुबली-पतली पाई गईं। इनमें से 4.4% तो बहुत ज्यादा कमजोर हैं। इस ग्रुप में 21% का वजन सामान्य से ज्यादा पाया गया। अध्ययन में यह भी बताया गया कि दोनों ही स्थितियां मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है।

इसके अलावा 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग में 25% शादीशुदा युवतियां गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं, वहीं 20 से 24 आयु वर्ग में 20% युवतियां इसका इस्तेमाल करती हैं। अध्ययन के मुताबिक, भारत में हर साल करीब तीन करोड़ महिलाएं गर्भधारण करती हैं। इन तीन करोड़ में से 20% महिलाएं कमजोर होती हैं, 53% महिलाओं में खून की कमी होती है और 8% महिलाएं 18 वर्ष से कम उम्र में ही मां बन जाती हैं। अध्ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि स्कूल में तो बच्चियों को आयरन और फॉलिक एसिड की गोली दी जाती है, लेकिन शादी और गर्भ धारण के बीच के समय में उन्हें यह गोली नहीं मिलती है।

 

 

Related posts