मातृ दिवस: ममता का सागर है वो मां, संसार में उसके समान कोई छाया नहीं, उस मां का सम्मान करो, अपमान नहीं…

चैतन्य भारत न्यूज

मां…. यह एक शब्द नहीं बल्कि इंसान की पूरी परिभाषा है। मां किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, मां शब्द ही सम्मान के बराबर होता है। मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य संतान के उत्थान में उनकी महान भूमिका को सलाम करना है।

एक शिशु का जब जन्म होता है, तो उसका पहला रिश्ता मां से होता है। एक मां शिशु को पूरे 9 माह अपनी कोख में रखने के बाद असहनीय पीड़ा सहते हुए उसे जन्म देती है और इस दुनिया में लाती है। इन नौ महीनों में शिशु और मां के बीच एक अदृश्य प्यार भरा गहरा रिश्ता बन जाता है। यह रिश्ता शिशु के जन्म के बाद साकार होता है और जीवनपर्यंत बना रहता है। इसलिए तो शिशु के मुख से पहला शब्द भी मां की निकलता है।

मां और बच्चे का रिश्ता इतना प्रेम से भरा होता है कि यदि बच्चे को जरा भी तकलीफ होती है तो मां बेचैन हो उठती है। वहीं तकलीफ के समय बच्चा भी मां को ही याद करता है। मां का दुलार और प्यार भरी पुचकार ही बच्चे के लिए सबसे अच्छी दवा का कार्य करती है। इसलिए ही ममता और स्नेह के इस रिश्ते को संसार का खूबसूरत रिश्ता कहा जाता है। दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता।

मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है. एक मां आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ में ही दे देती हैं। यही मां शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह मां ही होती है भयानक पीड़ा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। जब उसकी नन्ही-सी जान हाथों में आती है तो मां अपने सारे दर्द भूल जाती हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद मां के चेहरे पर एक संतोषजनक मुस्कान होती है इसलिए मां को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है।

मां तो अपने बच्चों को बड़ा करने में अपने सभी कष्टों को भुला देती हैं। वह बच्चों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपने सभी सुखों को त्याग देती हैं, लेकिन आज के समय में बच्चे अपने मां के इस समर्पण को, उसके त्याग को भुला देते हैं। जब मां को या पिता को उनके सहारे की जरुरत होती है तो वो उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। श्रीमद भागवत गीता में कहा गया है कि, मां की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है। यही मां शब्द की महिमा है।

आप सभी से निवेदन है कि कभी अपनी मां को दुख न दें। अगर वो आपसे सुख की अपेक्ष नहीं करती तो दुख की भी नहीं करती। माता-पिता आपके जन्मदाता है इसलिए उनका स्थान भगवान से कई ऊपर है। माता-पिता की एक संतोषभरी मुस्कान ही आपका जीवन संवार देगी।

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