आंख मारना और फ्लाइंग किस करना भी यौन उत्पीड़न, कोर्ट ने आरोपी को सुनाई एक साल जेल की सजा और जुर्माना

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चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. आंख मारना और फ्लाइंग किस के इशारे को यौन उत्पीड़न की संज्ञा देते हुए मुंबई की एक पॉक्सो कोर्ट ने 20 साल के युवक को दोषी माना है। कोर्ट ने आरोपी को 15 हजार रुपए जुर्माने और 13 महीने करावास की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि में से 10,000 रुपए की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।

बता दें 20 साल के युवक के खिलाफ 14 साल की नाबालिग ने शिकायत दर्ज कराई थी। 29 फरवरी 2020 को 14 साल की एक किशोरी ने अपनी मां को बताया कि, उसे एक शख्स ने आंख मारने के अलावा कई बार फ्लाइंग किस किया। लड़की के घरवालों ने एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। फिर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तब से वो सलाखों के पीछे था।

शर्त में फंस गया आरोपी

किशोरी ने बताया कि, आरोपी पहले भी इस तरह की हरकत कर चुका है। आरोपी को सजा प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) एक्ट के तहत सुनाई गई। गिरफ्तार शख्स ने ट्रायल के दौरान अदालत के सामने दावा किया कि लड़की की मां ने उसे इसलिए लड़की से बात करने से रोका क्योंकि वो दोनों अलग-अलग समुदाय के थे। उसने साथ ही आरोप लगाया कि उसे झूठा फंसाया गया क्योंकि लड़की के एक रिश्तेदार और उसमें शर्त लगी थी।

पहले भी कर चुका है ऐसी हरकत

बच्ची की मां ने भी कहा कि पीड़िता ने कई बार आरोपी के व्यवहार को लेकर उनसे शिकायत की थी और उन्होंने इसके लिए आरोपी को फटकार भी लगाई थी और इसके बाद पुलिस में शिकायत की थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि मामले में ठीक से जांच नहीं हुई और आरोपी ने यौन इरादे से ऐसा नहीं किया।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि, ‘दोषी पक्ष कुछ भी ऐसा रिकॉर्ड में नहीं लाया, जिससे ये साबित हो की मामला झूठा है।’ कोर्ट ने कहा कि, ‘आरोपी ये भी साबित करने में असफल रहा कि उसके खिलाफ पोक्सों एक्ट के आरोप किसी मकसद से लगाए गए हैं।’ कोर्ट ने कहा आगे कहा कि, ‘घटना के समय दोषी 19 साल का था तो उसे रियायत दी जा सकती है। अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आरोपी को अच्छी जिंदगी जीने का अवसर देने के लिए कुछ उदारता दिखाई जा सकती है।’

 

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