जन्मदिन विशेष: जिनकी याद में बनवाया गया था ताजमहल, उन्हीं मुमताज महल की 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान हो गई थी मौत

चैतन्य भारत न्यूज

शाहजहां की बेगम मुमताज महल का जन्म 27 अप्रैल 1593 को आगरा में हुआ था। मुमताज महल का असली नाम अर्जुमंद बानो था। मुमताज महल की जयंती विशेष पर जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें-

शाहजहां और मुमताज की मुलाकात सबसे पहले मीना बाजार में हुई थी। बाजार में मुमताज कुछ सिल्क का सामान बेच रही थी। मुमताज की खूबसूरती शाहजहां के दिलो-दिमाग में इस कदर बस गई कि वो मुमताज का पीछा करने लगे। कुछ समय बाद शाहजहां को पता चला कि जिस लड़की का वो पीछा कर रहे हैं उसका नाम अर्जुमंद बानो बेगम है जो कि उनकी मां और रानी नूर जहां की रिश्तेदार है।

शाहजहां का प्यार तो इस कदर परवान चढ़ चुका था कि वो खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने तुरंत अपने पिता और राजा जहांगीर से सामने अर्जुमंद से शादी करने की ख्वाहिश जाहिर की। जहांगीर भी अपने बेटे के प्यार को नजरअंदाज नहीं सके और फिर उन्होंने इस शादी के लिए हां कह दी। फिर 14 साल की उम्र में ही मुमताज की सगाई शाहजहां के साथ हो गई। सगाई के पांच साल बाद 10 मई, 1612 को शाहजहां से मुमताज का निकाह हुआ। शादी के बाद शाहजहां ने ही अर्जुमंद बानो बेगम को मुमताज महल नाम दिया।

बता दें मुमताज महल शाहजहां की तीसरी और पसंदीदा बेगम थी। मुमताज महल बहुत अच्छी शतरंज खिलाड़ी थी। वे शाहजहां से भी अच्छा खेल लेती थीं। मुमताज ने 14 बच्चों को जन्म दिया। इनमें से आठ लड़के और छह लड़कियां थीं। इनमें सिर्फ सात ही जिंदा बचे। शादी के बाद मुमताज ने लगातार 10 बच्चों को जन्म दिया। 10वें और 11वें बच्चे के जन्म में पांच साल का अंतर था। 1627 में वो 12वीं बार गर्भवती हुईं। दो साल बाद 1629 में 13वें बच्चे को जन्म दिया।

इतिहासकारों के मानें तो सन 1631 में जब लोधी ने विद्रोह किया तब शाहजहां मुमताज को लेकर बुरहानपुर आ गए। उस वक्त मुमताज 14वीं बार गर्भवती थीं। मुमताज ने गर्भावस्था के पूरे समय में भी 787 किलोमीटर का सफर तय किया था। लंबी यात्रा की वजह से मुमताज बेहद बुरी तरह थक गई थी और इसका असर उसके गर्भ पर पड़ा। मुमताज को दिक्कत शुरू होने लगी। 13 बच्चों को जन्म देने के कारण मुमताज शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो चुकी थीं। 14वें बच्चे को 1631 में जन्म देने के दौरान 30 घंटे की प्रसव पीड़ा से जूझते हुए मुमताज ने एक बेटी गौहर आरा को जन्म दिया।

उस वक्त शाहजहां युद्ध जीतने के लिए रणनीति बना रहे थे और मुमताज एक आखिरी बार अपने पति को देखना चाहती थीं। फिर शाहजहां मुमताज को देखने पहुंचे। मुमताज ने अपनी आंखे खोंली और शाहजहां को अपनी आखिरी ख्वाहिश बताते हुए कहा कि वो चाहती हैं उनकी मौत के बाद उनका सबसे खूबसूरत मकबरा बने। साथ ही मुमताज ने शाहजहां से उनके जाने के बाद किसी और से शादी न करने का भी वादा किया और फिर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। हालांकि, शाहजहां ने कुछ ही दिनों बाद मुमताज की छोटी बहन से शादी कर ली। इसके अलावा भी शाहजहां ने दो निकाह और किए।

मृत्यु के बाद मुमताज महल को बुरहानपुर में दफनाया गया था। फिर मुमताज महल की याद में शाहजहां ने ताजमहल बनाने का फैसला किया, जिसके निर्माण में 22 साल लगे। बुरहानपुर के जैनाबाद से मुमताज महल के जनाजे को एक विशाल जुलूस के साथ आगरा ले जाया गया और ताजमहल के गर्भगृह में दफना दिया गया। उस जुलूस पर उस समय आठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसी के साथ मुमताज और शाहजहां की ऐतिहासिक प्रेम कहानी हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज हो गई।

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