केरल के 150 से ज्यादा संस्थान चलाने वाली मुस्लिम सोसायटी ने बुर्के पर लगाई रोक

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चैतन्य भारत न्यूज

श्रीलंका में बुर्के पर बैन लगने के बाद भारत में भी इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। इसी बीच केरल के एक मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान ने परिसर में छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक लगा दी। संस्थान ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें उन्होंने राज्य में आगामी सत्र 2019-20 से अपने परिसरों में चेहरा ढकने पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए हैं।

ये सर्कुलर मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी (एमईएस) ने जारी किया है। पूरे राज्य में एमईएस के 150 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान हैं। एमईएस का मुख्यालय कोझिकोड में है। उन्होंने सर्कुलर में कहा है कि, ‘उनके किसी भी संस्थान में छात्र-छात्राएं बुर्का या चेहरे को ढंकने वाला कोई अन्य परिधान पहनकर नहीं आ सकते हैं। यदि वह बुर्का पहनकर आए तो उन्हें कक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।’ सर्कुलर में ये भी बताया गया है कि, इस संस्थान का ड्रेस कोड मुस्लिम समुदाय के परंपरागत पहनावे से विपरीत है। एमईएस के मुताबिक, पहले मुस्लिम समुदाय में बुर्का पहनना आम नहीं था, ये नया चलन है।

एमईएस के अध्यक्ष पीके फजर गफ्फूर ने बताया कि, यह नया नियम 2019-20 के शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। ना सिर्फ छात्र-छात्राएं बल्कि शिक्षक और शिक्षिकाओं पर भी ये नियम लागु किया जाएगा। पीके फजर गफ्फूर ने ये भी कहा कि, ‘समाज में जो भी परिधान स्वीकार्य न हो उसे पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती फिर चाहें उसका मजहब से जुड़ाव ही क्यों न हो।’ उनके इस फैसले का विरोध भी हुआ था लेकिन गफ्फूर ने कहा कि उनका फैसला अटल है। गौरतलब है कि, श्रीलंका में बुर्का बैन होने के बाद शिवसेना ने भी अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक लेख के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में बुर्के पर बैन लगाने की मांग की थी। हालांकि, फिर पार्टी ने सफाई देते हुए कहा था कि यह संपादक की निजी राय थी।

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