सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश मुस्लिम पक्ष के वकील, कहा- फैसला उम्मीदों के अनुरूप नहीं, पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे

zafaryab jilani

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद में शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने का फैसला दिया, जिस पर वो मस्जिद बना सकें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने असंतुष्टि जताई।



जफरयाब जिलानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं है। इसे लेकर हम विचार करेंगे।’ उन्होंने कहा कि, ‘हमें न बराबरी मिली और न ही न्याय। फैसले पर असहमति जताना हमारा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट भी कभी-कभी गलत हो सकता है। कोर्ट ने पहले भी अपने फैसलों पर पुनर्विचार किया है, अगर हमारी वर्किंग कमिटी फैसला लेती है तो हम भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।’


जिलानी ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि, ‘फैसले के बाद शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखें। यह किसी की जीत या हार नहीं है। हम आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा।’ जिलानी के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद ही यह फैसला लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं। जिलानी ने कहा कि, उनका मानना है कि फैसले के आधार पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए।

वहीं मुस्मिल पक्ष के पैरोकार इकबाल अंसारी ने फैसला आने के बाद कहा कि, ‘कोर्ट ने जो कुछ कहा, ठीक कहा। हम पहले से ही कहते रहे हैं कि कोर्ट जो भी फैसला करेगी उसे स्वीकार करेंगे। अब सरकार को फैसला करना है कि वह हमें जमीन कहां पर देती है।’


वहीं अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किया। साथ ही लोगों से देश में शांति बनाए रखने की अपील भी की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि, ‘एक बार फिर आपसे अपील करता हुं कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का हम सभी मिलजुलकर सम्मान व आदर करे।’


उमा भारती ने ट्वीट में लिखा कि, ‘माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस दिव्य फैसले का स्वागत। माननीय अशोक सिंघल जी को स्मरण करते हुए उनको शत्-शत् नमन। वह सब, जिन्होंने इस कार्य के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी उन्हें श्रद्धांजलि।’


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी ट्वीट कर कहा कि, ‘मानवता और संविधान भी हमारा धर्म है। हमें एकता, भाईचारे और प्रेम के साथ अपना हर धर्म निभाना है। आओ मिलकर दुनिया को दिखा दें ये गांधी का देश है, यहां एकता का परिवेश है।’


फैसला आने के बाद अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा ने बधाई देते हुए कहा है कि, ‘लोगों से आग्रह है कि फैसले के बाद जश्न न मनाएं। किसी तरह के अपमानजनक या उकसावे वाले व्यवहार पर कार्रवाई की जाएगी।’

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