कोर्ट ने पत्नी को दिया पति को हर महीने 2000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश, 9 साल से लड़ रहे हैं केस

justice

चैतन्य भारत न्यूज

तलाक के बाद गुजारा भत्ता के लिए पतियों के खिलाफ तो कई पत्नियों को आपने केस लड़ते हुए देखा होगा लेकिन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर फैमिली कोर्ट में इसका ठीक उल्टा मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में मंगलवार को फैमिली कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी का गुजारा भत्ता पति को देने के आदेश जारी किए हैं।

यह है मामला

दरअसल, खतौली तहसील क्षेत्र के रहने वाले किशोरी लाल सोहंकार का 30 साल पहले कानपुर की रहने वाली मुन्नी देवी के साथ विवाह हुआ था। शादी के कुछ दिनों तक तो सब ठीक था लेकिन इसके बाद दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया। पिछले 10 साल से दोनों अलग रह रहे हैं। किशोरी लाल की पत्नी कानपुर में स्थित भारतीय सेना में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी थीं। कुछ समय पहले ही वह रिटायर्ड हो गई थीं। मुन्नी देवी को 12 हजार रुपए पेंशन मिल रही है जिससे वह अपना गुजारा कर रही हैं। वहीं किशोरी लाल अपना गुजारा चाय बेचकर कर रहा है।

लेकिन किशोरी लाल ने अपनी दयनीय हालत के चलते 9 साल पूर्व मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट में गुजारे भत्ता के लिए एक केस दायर किया था जिसमें मंगलवार को फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पत्नी मुन्नी देवी को पति किशोरी लाल सोहंकार को 2 हज़ार रुपए गुजारा भत्ता देने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले से किशोरी लाल पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किशोरी लाल कहते हैं, ‘मैं कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं। लगभग 9 साल बाद कोर्ट का फैसला आया, लोगों से कर्ज लेकर केस लड़ा है। लॉकडाउन में भी इधर उधर से मांग कर अपना इलाज कराया है। कभी-कभी जब स्वस्थ रहता हूं तो चाय की दुकान कर लेता हूं लेकिन अब मैं दुकान करने के काबिल नहीं हूं।’

उन्होंने कहा कि, ‘लगभग 20 साल से विवाद चल रहा है। 2013 से मामला कोर्ट में है अब इसमें 2000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता आदेशित हुआ है जबकि 9 साल से जो मैं केस लड़ रहा हूं उसका कोई जिक्र नहीं है। कायदा यह है कि 1/3 गुजारा भत्ता मिलना चाहिए था जबकि मुझे 2000 प्रतिमाह मिला है। उसकी पेंशन 12,000 प्रतिमाह से अधिक है। आने वाले समय में मेरी स्थिति और खराब हो जाएगी। मैं अपना इलाज भी नहीं करा सकता।’

वहीं किशोरी लाल के वकील बालेश कुमार तायल ने कहा कि, ‘यह मामला फैमिली कोर्ट में पेंडिंग था। यह लीक से हटकर इसलिए है कि इसमें केस का दायर होना जरूरी है। किशोरीलाल ने सेक्शन 9 में प्रेस्टीज ऑफ कंज्यूमर राइट्स का मुकदमा दायर किया। उसके बाद भी उसने कोर्ट को कंप्लेंट नहीं की और वह उसके पास आकर नहीं रही। सबसे पहले सेक्शन 25 हिंदू एक्ट में हमने सूट फाइल किया। यह लगभग 7 से 8 साल पहले फाइल किया था। पहला मुकदमा तय होने के बाद इसमें जो फैसला आया है इसमें 2000 रुपये महीना गुजारा भत्ता तय हुआ है। दोनों का तलाक नहीं हुआ है जबकि इसमें कोर्ट पहले ही दोनों को साथ रहने का आदेश कर चुकी है।

Related posts