‘नदियों के पार’ की गूंजा पर कोरोना की मार, कहा- प्लीज मेरा गला घोंटकर मुझे मार दें

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन ने कई लोगों से उनका काम छीन लिया है। फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के मजूदरों से लेकर शोज में काम करने वाले कई एक्टर्स से उनकी रोजी-रोटी छिन गई है। हाल ही में फिल्म ‘नदियों के पार’ में गूंजा का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस सविता बजाज ने भी ऐसा ही खुलासा किया था। शगुफ्ता अली, बाबा खान के बाद कई फिल्मों में काम कर चुकीं सीनियर एक्ट्रेस सविता बजाज भी पाई-पाई को मोहताज हो गई हैं। सविता बजाज कोरोना और फिर बीमारी के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। हाल ही में मदद की गुहार लगाते हुए सविता बजाज ने बताया कि उनकी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई है और अब उनके लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

सविता बजाज की हालत ऐसी है कि एंबुलेंस के स्ट्रेचर पर लेटीं अभिनेत्री ने कहा था कि मेरा गला घोंटकर मुझे मार दो। मुझे ऐसी जिंदगी नहीं जीनी है। इससे बेहतर ये है कि मैं मर जाऊं। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है, जो मुझे संभाले। बता दें कि सविता बजाज को बिगड़ी सेहत और बीमारियों के चलते आए दिन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। तीन महीने पहले सविता बजाज कोरोना की चपेट में भी आ गई थीं। तब उन्होंने 22 दिनों तक अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था। सविता बजाज को जब हाल ही सांस लेने में तकलीफ हुई तो दोबारा अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

सविता बजाज ने बताया कि उनकी मदद के लिए राइटर्स एसोसिएशन और CINTAA (सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन) की तरफ से जो मदद मिल पा रही हैं, उसी से गुजारा चल रहा है। उन्होंने बताया कि राइटर्स एसोसिएशन से दो हजार और CINTAA की तरफ से पांच हजार रुपये की मदद मिलती है, जिससे वह गुजारा कर रही हैं लेकिन उम्र के साथ बढ़ती बीमारियों ने उनकी चिंता को बढ़ा दिया है।

‘दुख की बात है कि मेरा ध्यान रखने वाला भी कोई नहीं है। 25 साल पहले मैंने फैसला किया था कि मैं अपने होमटाउन दिल्ली वापस लौट जाऊंगी। लेकिन मेरे परिवार में से कोई भी मुझे साथ नहीं रखना चाहता। मैंने बहुत कमाया। बहुत जरूरतमंदों की मदद की पर आज मुझे मदद की जरूरत है।’

इसके साथ ही सविता का कहना है कि ‘इतने सालों तक काम करने के बाद भी मुंबई में मेरा अपना कोई घर नहीं है। मैं चाहती हूं कि कोई मेरे जैसे उन सीनियर एक्टरों के लिए ओल्ड एज होम बनाएं जो खुद पर निर्भर हैं। मैं मलाड में एक रूम किचन में रहती हूं और सात हजार किराया देती हूं। मैं पैसे नहीं मांगना चाहती पर अब मेरे लिए मैनेज करना बहुत मुश्किल हो रहा है।’

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