साल में एक बार सिर्फ नाग पंचमी पर ही खुलते हैं इस मंदिर के कपाट, स्वयं नागराज देते हैं दर्शन

चैतन्य भारत न्यूज 

हिन्दू धर्म में हर महीने कोई न कोई खास पर्व होता है। उन्हीं खास महीनों में शामिल है सावन का महीना। सावन के महीने में भगवान शिवशंकर की पूजा-आराधना की जाती है। भोलेनाथ के गले की शोभा बढ़ाने वाले नाग देवता का त्योहार भी सावन महीने में ही आता है। नाग पंचमी शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार नाग पंचमी 25 जुलाई को है। इस मौके पर हम आपको आज उज्जैन के प्रसिद्द महाकालेश्वर मंदिर में मौजूद नाग चंद्रेश्वर मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसके कपाट साल में एक बार सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं।

वैसे तो काशी, इलाहाबाद से लेकर देश के कई राज्यों में नाग देवता का मंदिर है लेकिन उज्जैन में स्थित नाग चंद्रेश्वर मंदिर का अलग ही महत्व है। इस मंदिर में मौजूद 11वीं शताब्दी की नाग चंद्रेश्वर प्रतिमा के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हर साल जब नाग पंचमी के दिन इस मंदिर के कपाट खुलते हैं और विधिवत नाग देवता की पूजा होती है तो उस समय स्वयं नागराज मंदिर में उपस्थित रहते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

नाग चन्द्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में सबसे ऊपर यानी तीसरे खंड में स्थित है। इस मंदिर में नाग राज के साथ ही शिव-पार्वती और भगवान गणेश की भी अतिसुंदर प्रतिमा है, शिव पार्वती के छत्र के रूप में ही नाग देवता अपना फन फैलाए हुए हैं। मान्यता है कि यह मंदिर दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर देवों के देव शिव और पार्वती की ऐसी अद्भुत प्रतिमा स्थापित है।

इस मंदिर का इतिहास

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के नागराज तक्षक ने कई सालों तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शंकर प्रकट हुए थे और उन्होंने नागराज को वरदान दिया था। भोलेनाथ से आशीर्वाद मिलने के बाद ही तक्षक ने शिवजी के सान्निध्य में वास करना शुरू कर दिया। माना जाता है कि इन्हीं कारणों से मंदिर में मूर्ति भगवान शिव और तक्षक के साथ स्थापित की गई है।

300 साल में पहली बार भक्त नहीं करेंगे दर्शन

भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नागपंचमी के लिए एक साल बाद शुक्रवार मध्यरात्रि खोले गए। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीतगिरीजी महाराज के सान्निध्य में भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा-अर्चना की गई। कोरोना संक्रमण के चलते 300 साल में पहली बार भक्तों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया है। भक्तों को लाइव प्रसारण के जरिए मंदिर परिसर में लगी मेगा स्क्रीन और स्मार्ट फोन व टीवी पर भगवान के दर्शन होंगे।

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