नागपंचमी पर 20 साल बाद बना ऐसा दुर्लभ संयोग, ये हैं कालसर्प दोष दूर करने के उपाय

चैतन्य भारत न्यूज 

सावन में आने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 5 अगस्त के दिन नागपंचमी का पर्व है साथ ही सावन का तीसरा सोमवार भी है। खास बात यह है कि, नागपंचमी और सोमवार का दिन एक साथ पड़ना आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सुखद और दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। ऐसा संयोग 20 वर्ष बाद प्राप्त हो रहा है।  माना जा रहा है कि इस वर्ष सावन के महीने में भोले बाबा की भक्तों पर असीम कृपा है। शास्त्रों के अनुसार यह दुर्लभ संयोग भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण कराएगा। ज्योतिष के अनुसार कालसर्प दोष निवारण और पितृ दोष की मुक्ति के लिए यह श्रेष्ठ दिन है। आइए जानते हैं नागपंचमी का महत्व और कालसर्प दोष दूर करने के उपाय।

नागपंचमी का महत्व

नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। हिन्दू धर्म में नाग को भगवान शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु की शैय्या माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि नागपंचमी के दिन अगर नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा-अर्चना की जाए तो वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। मान्यता है कि, कुंडली से कालसर्प दोष दूर करने के लिए नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा और रुद्राभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से इस दोष से मुक्ति मिल जाती है।

कालसर्प दोष दूर करने के उपाय

  • नागपंचमी के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
  • नागपंचमी का व्रत कर पूजा के दौरान महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • नागपंचमी के दिन पूजा स्थान पर एक चांदी के सांपों का जोड़ा रखकर उसकी पूजा करें।
  • नागपंचमी के दिन भगवान शिव, माता पार्वती सहित गणेश जी की पूजा करें।
  • कालसर्प दोष दूर करने के लिए नागपंचमी के दिन मंदिर में जाकर पंडित जी से रुद्राभिषेक करवाएं।

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