नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं सभी कष्ट, जानिए इसकी विशेषता और महत्व

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चैतन्य भारत न्यूज

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में शिवभक्त भोले बाबा के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग कार्य करते हैं। मान्यता है कि, सावन महीने में जो भी भक्त भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का नाम जपता है उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। इन्हीं में से एक है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जिसे प्रमुख माना गया है। आइए जानते हैं नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता के बारे में।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दसवां स्थान है। यह धाम सभी ज्योतिर्लिंगों से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि, भगवान शिव के मंदिरों में यह पहला मंदिर है जिसका विवरण शिवपुराण में किया गया है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है। भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है, इसीलिए विष आदि के बचाव के लिए लोग यहां आते हैं। कहा जाता है कि जो लोग नागेश्वर महादेव की पूजा करते हैं वे विष से मुक्त हो जाते है। रूद्र संहिता श्लोक में भी नागेश्वर का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मान्यता है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता

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इसी मंदिर परिसर में भगवान शिव जी की अति विशाल पद्मासन मुद्रा में प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा 125 फिट ऊंची है और 25 फिट चौड़ी है। मंदिर के अंदर तलघर में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यह एक अदभुत तीर्थस्थल है और इसकी कथा भी अद्वितीय है। इस ज्योतिर्लिंग को जागेश्वर भी कहा जाता है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जहां बना हुआ है वहां कोई गांव या शहर नही है बल्कि यह मंदिर द्वारका से दूर जंगलो में बना हुआ है। नागेश्वर मंदिर परिसर में भगवान शिव की विशालकाय मूर्ति तीर्थयात्रियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

कहां हैं और कैसे पहुंचे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

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भगवान शिव का यह प्रसिद्द ज्योतिर्लिंग गुजरात के प्रांत द्वारका पुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर स्थित है।

हवाई मार्ग : हवाई यात्रा के जरिए द्वारका पहुंचना चाहते हैं तो 145 किलोमीटर की दूरी पर जामनगर नजदीकी एयरपोर्ट है। यहां से आप यातायात के दूसरे साधन ले सकते हैं।

रेल मार्ग : अहमदाबाद से ओखा के लिए रेल चलती है। आप द्वारका रेलवे स्टेशन उतर सकते हैं।

सड़क मार्ग : नागेश्वर धाम के लिए गुजरात के जामनगर और राजकोट से नियमित रूप से बसें चलाई जाती हैं। सड़क मार्ग के जरिए भी नागेश्वर मंदिर पहुंच सकते है।

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