आज है नागेश्वर पंचमी, परेशानी से मुक्ति और विजय प्राप्ति के लिए की जाती है शिव पूजा

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के शुक्लपक्ष की पंचमी का काफी महत्व है। इस दिन भगवान शिव के नागेश्वर रूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव निवास के लिए कैलाश पर्वत पर गए थे। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं नागेश्वर पंचमी का महत्व और पूजन-विधि।



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नागेश्वर पंचमी का महत्व

पंचमी तिथि के स्वामी नाग होने से इस तिथि पर भगवान शिव के नागेश्वर रूप की पूजा की जाती है। नागेश्वर का अर्थ होता है नागों के देवता। 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को आठवां स्थान प्राप्त है। प्रमुख शिव ग्रंथों के अनुसार ये ज्योतिर्लिंग गुजरात के दारुक वन यानी द्वारिका पुरी में स्थित है। मान्यता है कि जो लोग नागेश्वर महादेव की पूजा करते हैं वे विष से मुक्त हो जाते है। रूद्र संहिता श्लोक में भी नागेश्वर का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मान्यता है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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नागेश्वर पूजा-विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं और व्रत एवं शिवपूजा का संकल्प लें।
  • इसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवजी पर दूध एवं जल चढ़ाएं।
  • पूजा के दौरान चंदन, अक्षत, मौली, बिल्वपत्र, मदार और धतूरे के फूल शिवजी को चढ़ाएं।
  • इसके बाद भस्म लगाएं और फिर मिठाई का भोग लगाएं एवं उसके बाद आरती करें।
  • पूजा करते समय ऊं नागेश्वराय नम: शिवाय नम: मंत्र बोलें।

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