नर्मदा जयंती पर लगे जयकारे, जानें इस पर्व से जुड़ीं पौराणिक कथाएं

चैतन्य भारत न्यूज।

होशंगाबाद। नर्मदा जयंती के अवसर पर नर्मदा के प्रमुख घाटों में भारी भीड़ देखी गई। रास्तों पर श्रद्धालु नर्मदे हर का घोष करते नजर आए। होशंगाबाद के सेठानी घाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान कर मां नर्मदा की पूजन की। जगह-जगह भक्तों की सेवा के लिए भंडारे भी हुए।

नर्मदा जयंती के उपलक्ष्य में देर रात से ही लोग घाटों पर जुटना शुरू हो गए थे। होशंगाबाद के सभी घाटों पर भीड़ लगी है। आस्था की डुबकी के साथ नरसिंहपुर में पंचक्रोशी परिक्रमा भी शुरू हो गई है। जबलपुर के ग्वारीघाट और अमरकंटक में भी बड़ी संख्या में लोग मां नर्मदा का आशीर्वाद लेने पहुंचे। बड़वानी के राजघाट पर मां नर्मदा को 1100 मीटर की चुनरी ओढ़ाई गई।

जानें नर्मदा से जुड़ीं पौराणिक कथाएं….

कैसे हुई थी उत्पत्ति…

भगवान शंकर लोक कल्याण के लिए तपस्या करने मैकाले पर्वत गए थे, उनके पसीने की बूंदों से इस पर्वत पर एक कुंड का निर्माण हुआ। इसी कुंड में एक बालिका उत्पन्न हुई। जो शांकरी व नर्मदा कहलाई। शिव के आदेशानुसार वह एक नदी के रूप में देश के एक बड़े भूभाग में रव (आवाज) करती हुई प्रवाहित होने लगी। रव करने के कारण इसका एक नाम रेवा भी प्रसिद्ध हुआ। मैकाले पर्वत पर उत्पन्न होने के कारण वह मैकाले सुता भी कहलाई।

एक कथा ये भी 

चंद्रवंश के राजा हिरण्यतेजा को पितरों को तर्पण करते समय यह अहसास हुआ कि उनके पितृ अतृप्त हैं। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की तथा उनसे वरदान स्वरूप नर्मदा को पृथ्वी पर अवतरित करवाया। भगवान शिव ने माघ शुक्ल सप्तमी पर नर्मदा को लोक कल्याणार्थ पृथ्वी पर जल स्वरूप होकर प्रवाहित रहने का आदेश दिया।

लगभग 1200 किलोमीटर का सफर 

अमरकंटक से प्रकट होकर लगभग 1200 किलोमीटर का सफर तय कर नर्मदा गुजरात के खंभात में अरब सागर में मिलती है।नर्मदा के जल से मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा लाभान्वित है।  विध्यांचल पर्वत श्रेणी से प्रकट होकर देश की ह्रदय स्थली मध्य प्रदेश में यह प्रवाहित होती है।  यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है तथा डेल्टाओं का निर्माण नही करती। इसकी कई सहायक नदियां भी हैं।

परिक्रमा भी की जाती है

यह विश्व की एक मात्र ऐसी नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है क्योंकि इसके हर घाट पर पवित्रता का वास है तथा इसके घाटों पर महर्षि मार्कण्डेय, अगस्त्य, महर्षि कपिल एवं कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की है।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नर्मदा तट पर

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर इसके तट पर ही स्थित है। इसके अलावा भृगुक्षेत्र, शंखोद्वार, धूतताप, कोटीश्वर, ब्रह्मतीर्थ, भास्करतीर्थ, गौतमेश्वर। चंद्र द्वारा तपस्या करने के कारण सोमेश्वर तीर्थ आदि 55 तीर्थ भी नर्मदा के विभिन्न घाटों पर स्थित हैं।

 

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