अगले ‘मिशन मून’ में पहले महिला और फिर पुरुष को चांद पर उतारेगा नासा

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चैतन्य भारत न्यूज

मानव को चांद पर पहुंचे हुए 50 साल हो गए हैं। इस खास अवसर पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि, वह अपने एक और मिशन के तहत इस दिशा में एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल करने को तैयार है। नासा के मुताबिक, वह एक नए मिशन के तहत पहले महिला और उसके बाद पुरुष को चांद की सतह पर उतारेगा।

इस मिशन का नाम है ‘आर्टेमिस’। नासा के मुताबिक, उनका यह स्पेस मिशन आर्टेमिस, मंगल मिशन में बेहद अहम भूमिका निभाएगा। नासा ने कहा कि, ‘मंगल पर हमारा रास्ता आर्टेमिस बनाएगा। नया आर्टेमिस मिशन अपोलो कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर अपना रास्ता तय करेगा।’ जानकारी के मुताबिक, यह अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उन सभी क्षेत्रों के बारे में पता लगाएंगे, जहां पहले कोई भी इंसान नहीं गया है। साथ ही वे ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलते हुए उस तकनीक का भी परीक्षण करेंगे जो सौरमंडल में मनुष्य की सीमाओं को विस्तार देगी। नासा के मुताबिक, इस मिशन के जरिए वह चांद की सतह पर बर्फ, पानी और अन्य सभी प्राकृतिक संसाधनों का भी पता लगाएंगे, जिससे कि भविष्य में अंतरिक्ष की सभी यात्राएं सफल हो सके। चंद्रमा पर यह सभी चीजें खोज निकालने के बाद उनका अगला मिशन मंगल ग्रह होगा।

नासा ने बताया कि, चांद पर जाने वाले इन अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी 2024 में होगी। इस मिशन के लिए करीब 30 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे। साथ ही अंतरिक्ष फ्लाइट अपोलो-11 की कीमत भी करीब इतनी ही होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1961 में अमेरिका द्वारा शुरू किए गए अपोली कार्यक्रम की लागत भी 25 अरब डॉलर ही थी। बता दें मिशन अपोलो-11 के तहत ही 50 साल पहले दो अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरे थे। उस समय मिशन की लागत छह अरब डॉलर आई थी, जो आज के 30 अरब डॉलर के बराबर है। नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने बताया कि, अपोलो कार्यक्रम और ‘आर्टेमिस’ के बीच यह अंतर यह है कि पहले चांद की सतह पर जाकर मौजूदगी दर्ज करवाई थी और अब वहां एक स्थायी मानव उपस्थिति होगी।

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