मौलाना अबुल कलाम आजाद की याद में मनाया जाता है ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’, जानिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

भारत के पहले उपराष्ट्रपति मौलाना अबुल कलाम आजाद की याद में देश 11 नवंबर को ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ मनाता है। बता दें मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) ने 11 सितंबर, 2008 को घोषणा की थी कि भारत में अबुल कलाम आजाद ने शिक्षा के क्षेत्र में कई योगदान दिए हैं, इसलिए उनको याद करके भारत के इस महान पुत्र के जन्मदिन को शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। भारत में शिक्षा के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मौलाना अबुल कलाम आजाद आज ही के दिन यानी 11 नवंबर, 1888 को पैदा हुए थे।



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मौलाना आजाद ने उर्दू, फारसी, हिंदी, अरबी और अंग्रेजी भाषाओं में महारथ हासिल की। मौलाना आजाद ने महात्मा गांधी से प्रभावित होकर भारत के स्वतंत्रा संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भारत के बंटवारे का घोर विरोध किया। इतना ही नही बल्कि वह हिंदू-मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पैरोकार थे।

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कहा जाता है कि, सोलह साल में ही उन्हें वो सभी शिक्षा मिल गई थीं जो आमतौर पर 25 साल में मिला करती थी। मौलाना आजाद स्वयं उर्दू के बड़े एवं काबिल साहित्यकार थे, परंतु शिक्षा मंत्री बनने के बाद उर्दू की जगह अंग्रेजी को अत्यधिक तरजीह दी। हालांकि उनका मानना था कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए। मौलाना आजाद की अगुवाई में साल 1950 में संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी का गठन हुआ था।

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इसके साथ ही 1949 में सेंट्रल असेंबली में उन्होंने आधुनिक विज्ञान के महत्व पर ज्यादा जोर दिया था। मौलाना आजाद ने शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए अत्यधिक स्कूलों, कालेजों एवं विश्वविद्यालयों की स्थापना करवाई थी। एक स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद के तौर पर उनके योगदान के लिए 1992 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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