विस्तृत में जानिए नई शिक्षा नीति की 6 खास बातें

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने आज नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। ये बहुप्रतीक्षित नीति स्कूल से कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव लाएगी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि, कैबिनेट बैठक में आज नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है। 34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए ये बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं नई शिक्षा नीति की 6 खास बातें…


पहला- नई शिक्षा नीति में भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है। छात्र 2 से 8 साल की उम्र में जल्दी भाषाएं सीख जाते हैं। इसलिए उन्हें शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है। नई शिक्षा नीति के मुताबिक, छात्रों को कक्षा 6वीं से 8वीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स करना होगा।

दूसरा- नई शिक्षा नीति केंद्र सरकार द्वारा नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। यह नया प्रस्ताव 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है। ये पाठ्यक्रम 3 से 18 साल तक के बच्चों यानी नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है। छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए 5 साल का प्रोग्राम तय किया गया है। इनमें 3 साल प्री-प्राइमरी और कक्षा-1 और 2 को जोड़ा गया है। इसके बाद कक्षा-3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है। इसके अलावा क्लास-6, 7, 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है। आखिरी 4 वाले में हाई स्टेज में कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं, 12वीं को रखा गया है।

तीसरा- केंद्र सरकार ने बताया है कि, पुरानी व्यवस्था में 4 साल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद यदि कोई छात्र आगे नहीं पढ़ सकता है तो उसके पास कोई उपाय नहीं है।फिर छात्र आउट ऑफ द सिस्टम हो जाता है। लेकिन अब नई शिक्षा नीति में थोड़ा सा बदलाव किया गया है। नए सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी।

चौथा- मल्टीपल एंट्री थ्रू बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत छात्र के फर्स्ट, सेकेंड ईयर के क्रेडिट डिजीलॉकर के माध्यम से क्रेडिट रहेंगे। जिससे कि अगर छात्र को किसी कारण ब्रेक लेना है और एक फिक्स्ड टाइम के अंतर्गत वह वापस आता है तो उसे फर्स्ट और सेकंड ईयर रिपीट करने को नहीं कहा जाएगा। छात्र के क्रेडिट एकेडमिक क्रेडिट बैंक में मौजूद रहेंगे। यानि की स्पष्ट है कि छात्र अपनी आगे की पढ़ाई में भी उसका इस्तेमाल कर सकेंगे।

पांचवां- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत एमफिल पाठ्यक्रमों को बंद किया जाएगा। साथ ही बोर्ड परीक्षाएं जानकारी के अनुप्रयोग पर आधारित होंगी।

छठा- नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई सारे अहम बदलाव किए गए हैं। हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर)। उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी GER पहुंचने का लक्ष्य है।

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