अलविदा 2020 : सिर्फ कोरोना ही नहीं, इन आपदाओं ने भी साल 2020 को किया था जख्मी

चैतन्य भारत न्यूज

साल 2020 में कोरोना वायरस ने दुनियाभर में कोहराम मचा रखा है। अब तक इस वायरस की चपेट में आकर लाखों लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, साल 2020 में कोरोना के अलावा कुछ ऐसे प्राकृतिक कहर भी बरपा गया जो लोगों के जेहन में हमेशा रहेंगे। इसमें से कुछ हादसे तो प्रकृति ने खुद बरपाए, कुछ हादसे मानवजनित क्लाइमेट चेंज की वजह से हुए। साल 2020 सिर्फ बीमारी के लिए ही नहीं जाना जाएगा, बल्कि इन आपदाओं के लिए भी याद किया जाएगा।

  • 28 जनवरी को कैरीबियन में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। यह इतना ताकतवर था कि इसका असर जमैका और क्यूबा तक महसूस किया गया। इस भूकंप से किसी की मौत तो नहीं हुई, लेकिन इसने धरती के एक बड़े हिस्से को हिलाकर रख दिया था। ये भूकंप आया था नॉर्थ अमेरिकन टेक्टोनिक प्लेट और कैरीबियन प्लेट के आपस में खिसकने की वजह से।
  • फिलिपींस का ताल ज्वालामुखी 12 जनवरी को फटा। यह इतना तेज था कि इसके धुएं और राख के गुबार आसमान में 14 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा रहे थे। यह ज्वालामुखी करीब 40 साल बाद फटा था। राख और धुएं के गुबार 100 किलोमीटर दूर तक फैला। राजधानी मनीला में भी अंधेरा हो गया था। इस ज्वालामुखी के फटने के बाद 39 लोगों की मौत हुई थी।
  • तुर्की में 24 जनवरी को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र एलाजिग प्रांत था। ये भूकंप छोटा था लेकिन जानलेवा था। इसकी वजह से 41 लोगों की मौत हो गई और 1000 लोग जख्मी हो गए। दर्जनों इमारतें गिर गईं। इस भूकंप की गहराई सिर्फ 10 किलोमीटर थी। जिस भूंकप की गहराई कम होती है, उसकी वजह से धरती में कंपन ज्यादा होता है और नुकसान भी।
  • ऑस्ट्रेलिया की आग को कोई नहीं भूल सकता। इस आग ने 1.20 करोड़ हेक्टेयर जमीन को जलाकर खाक कर दिया। 33 लोगों की मौत हुई और करीब 100 करोड़ जीव-जंतु मारे गए। इस हादसे के जिम्मेदार इंसान ही हैं। क्योंकि क्लाइमेट चेंज की वजह ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में नमी कम होती जा रही है, इसलिए वहां लगने वाली आग जल्दी खत्म नहीं होती।
  • 23 जून को मेक्सिको के ओक्साका में 7.4 तीव्रता का भूंकप आया। इसका केंद्र सांता मारिया जडानी के तट पर 9 किलोमीटर की गहराई पर था। इस भूकंप की वजह से 10 लोगों की मौत हुई थी। ये लोग एक ही इमारत में थे। नॉर्थ अमेरिकी प्लेट और कोकोस प्लेट के आपसी खींचतान की वजह से ये भूकंप आया था।
  • अलास्का में इस साल का सबसे ज्यादा तेज भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.8 थी। 22 जुलाई को आए इस भूंकप से किसी की मौत नहीं हुई लेकिन एक बड़ी प्राकृतिक घटना दर्ज की गई। अलास्का के नीचे पैसिफिक प्लेट खिसक कर नॉर्थ अमेरिकन प्लेट के नीचे चली गई थी। इसकी वजह से कोई सुनामी तो नहीं आई लेकिन यह एक बड़ा भूकंप था।
  • 16 से 17 अगस्त के बीच बिजली गिरने की वजह से कैलिफोर्निया के जंगलों में आग लग गई। ऑस्ट्रेलिया के बाद एक और जंगल की आग ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस आग से 16.5 लाख हेक्टेयर जमीन जल गई। 10,448 इमारतें खाक हो गईं और 33 लोगों की मौत हुई। इस आग को नाम दिया गया अगस्त कॉम्प्लेक्स फायर। इसने कैलिफोर्निया के सात काउंटी को जला दिया था। इसे बुझाने में तीन महीने लगे।
  • 13 नवंबर को आए चक्रवाती तूफान आइओटा ने कैरीबियन और मध्य अमेरिका में तबाही मचाई। पांचवीं कैटेगरी के इस तूफान की वजह से 260 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इस तूफान में 45 लोग मारे गए। इसके ठीक पहले इसी इलाके में हरिकेन एटा आया था। तब 150 लोगों की मौत हुई थी। 7.2 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हुआ था।
  • 14 दिसंबर को इटली में ज्वालामुखी माउंट एटना फट पड़ा। इसने इतना राख और धुआं उड़ाया कि इसकी वजह से इटली में कुछ समय के लिए हवाई सेवाएं बंद करनी पड़ी। इसकी राख का गुबार 4 किलोमीटर ऊंचाई तक गया था। इसका धमाका इतनी तेज था कि कैटानिया शहर में 4.8 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। माउंट एटना की सक्रियता 1500 ईसा पूर्व से दर्ज की जा रही है। ऐसा माना जाता है कि यह ज्वालामुखी अगले 5 लाख सालों तक सक्रिय रह सकता है।

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