इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर प्रसन्न होगी मां गौरी, जानिए अष्टमी का महत्व और पूजा-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज

नवरात्रि में अष्टमी तिथि का खास महत्व होता है। इस बार अष्टमी 6 अक्टूबर को पड़ रही है। नवरात्रि के इन 9 दिनों में भक्‍तजन मां के नौ स्‍वरूपों की पूजा करते हैं। महागौरी देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप है। महाअष्टमी के दिन इन्हीं की पूजा का विधान है। महागौरी मां ममता की मूरत हैं और परम कल्याणकारी हैं। तो आइए जानते हैं अष्टमी पूजा का महत्व और विधि।



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अष्टमी पूजा का महत्व

नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा का विधान है। जैसा कि नाम से ही प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है।

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इनकी 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा नाम से भी इन्हें जाना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त महागौरी की सच्चे मन से आराधना करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता ने श्री राम को पति रूप में प्राप्त करने के लिए महागौरी की पूजा अर्चना की थी।

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अष्टमी पूजा-विधि

  • अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद देवी दुर्गा की विधिवत पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा के दौरान माता को फूल अर्पित करें और खीर, हलवे और मिष्ठान का भोग लगाएं।
  • इस दिन नौ कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
  • माता की पूजा के दौरान इन मंत्रों ‘ॐ महागौर्य: नम:’, ‘ॐ नवनिधि गौरी महादैव्ये नम:’ का जाप करें।

अष्टमी का शुभ मुहूर्त

सुबह 10:30 बजे से 11:18 बजे तक

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