मां दुर्गा के इस अनोखे मंदिर में बलि के बाद भी जिंदा रहते हैं बकरे, नहीं बहता रक्त

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चैतन्य भारत न्यूज

नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के इस खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे माता के एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में जहां बकरे की बलि दी जाती है, लेकिन रक्त नहीं बहता है। हम बात कर रहे है बिहार के मुंडेश्वरी मंदिर की। इस मंदिर में केवल हिंदू ही नहीं अन्य धर्मों के लोग भी बलि देने आते हैं और आंखों के सामने चमत्कार होते देखते हैं।



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श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां मुंडेश्वरी सच्चे मन से मांगी हर मनोकामना को पूरी करती हैं। मुंडेश्वरी माता मंदिर मोहनियां (भभुआ रोड) रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि ये देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक हैं।

यहां है बलि देने की अलग परंपरा

इस मंदिर में बलि की प्रकिया थोड़ी अलग है। मुंडेश्वरी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पशु बलि की सात्विक परंपरा है। यहां बलि में बकरा चढ़ाया जाता है, लेकिन उसका जीवन नहीं लिया जाता। जब बलि के लिए बकरे को माता की प्रतिमा के सामने लाया जाता है तो पुजारी चावल के कुछ दाने मूर्ति को स्पर्श कराकर बकरे पर डालता है। इससे बकरा बेहोश हो जाता है। कुछ देर की पूजा के बाद पुजारी फिर से बकरे पर चावल डालते हैं तो वह होश में आ जाता है। उसे आजाद कर दिया जाता है या भक्त को लौटा दिया जाता है। यह चमत्कार आंखों के सामने जब होता है, तब आप यकीन नहीं कर पाते हैं।

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मंदिर की विशेषता

कहा जाता है कि, चण्ड-मुण्ड नाम के असुर का वध करने के लिए देवी यहां आईं थीं। चण्ड के विनाश के बाद मुण्ड युद्ध करते हुए इसी पहाड़ी में छिप गया था। यहीं पर माता ने मुण्ड का वध किया था। इसलिए यह माता मुंडेश्वरी देवी के नाम से प्रसिद्ध हैं।

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कैसे पहुंचे मंदिर

ये मंदिर बिहार के कैमूर जिले में स्थित है। मुंडेश्वरी मंदिर पहुंचने के लिए यहां से सबसे करीबी रेलवे स्टेशन भभुआ रोड है। मंदिर का निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर, वाराणसी में है। इसके अलावा वाराणसी से बस, रेल या प्राइवेट कार से आसानी मंदिर पहुंच सकते हैं।

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