निर्भया केस: 7 साल बाद दोषी मुकेश को आया याद, कहा- घटना के समय मैं राजस्थान में था

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के चारों गुनहगारों को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी दी जानी है। इससे बचने के लिए सभी दोषी अलग-अलग कानूनी दाव पेंच इस्तेमाल कर रहे हैं। अब दोषी मुकेश ने अपनी फांसी को टालने के लिए हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल की है।



मुकेश ने अपने वकील एमएल शर्मा के माध्यम से डाली गई याचिका में दावा किया है कि वह 17 दिसंबर 2012 को राजस्थान से गिरफ्तार हुआ था। वह तो वारदात वाले स्थल पर घटना के वक्त था भी नहीं। ऐसे में वह इस केस में दोषी नहीं है। साथ ही उसने ये भी दावा किया है कि तिहाड़ जेल में उसका शोषण हुआ था। उसके साथ जेल में मारपीट की गई।

बता दें, इस महीने की शुरुआत में दिल्ली की कोर्ट ने चारों गुनहगारों मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय सिंह (31) को 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी देने का वॉरंट जारी किया था। इसके पहले तीन बार फांसी टल चुकी है। इससे पहले सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की उस याचिका को खारिज कर किया, जिसमें उसने सुधारात्मक याचिका और दया याचिका दोबारा से इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी थी।

वहीं अक्षय ठाकुर की पत्नी ने औरंगाबाद परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की और कहा है कि मैं उसकी विधवा के रूप में अपना जीवन नहीं जी सकती। अक्षय की पत्नी ने कोर्ट में दी गई अर्जी में कहा है कि, ‘मेरे पति निर्दोष हैं, ऐसे में मैं उनकी विधवा बन कर नहीं रहना चाहती। इसलिए मुझे अपने पति से तलाक चाहिए।’ जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 19 मार्च को सुनवाई की तारीख तय की गई है और फिर 20 मार्च को सभी आरोपितों को फांसी दी जानी है।

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