केंद्र सरकार की याचिका पर निर्भया के गुनहगारों का बयान- जल्दबाजी में न्याय करना मतलब न्याय को दफनाना

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. दिल्ली में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में केंद्र सरकार ने दोषियों की फांसी पर रोक लगाने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस पर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि, ‘जल्दबाजी में न्याय का मतलब है न्याय को दफनाना।’



रविवार को दोषियों द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी गई कि, ‘उन्हें एक ही आदेश के जरिए मौत की सजा सुनाई गई है, इसलिए उन्हें एक साथ फांसी देनी होगी और उनकी सजा पर अलग-अलग समय पर क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता।’

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि, ‘निर्भया सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले के दोषी कानून के तहत मिली सजा के अमल में विलंब करने की सुनियोजित चाल चल रहे हैं।’ उनका यह भी कहना था कि, ‘समाज और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए इन सभी दोषियों को तुरंत फांसी पर लटकाने की जरूरत है’। वकील तुषार ने यह भी कहा कि, ‘ये जानबूझ कर किया जा रहा है। ये न्याय के लिए हताशा की स्थिति है। इन्होंने एक लड़की का सामूहिक रेप किया था।’

उनके इस बयान के सामने आने के बाद तीन दोषियों अक्षय, विनय और पवन के वकील एपी सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट की जल्दबाजी पर सवाल उठाया। सिंह ने कहा कि, ‘दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से संबंध रखते हैं। कोर्ट को इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए।’

वहीं एक और दोषी मुकेश की वकील रेबेका जॉन ने कोर्ट में कहा कि, ‘नियम सबके लिए एक होना चाहिए चाहे दोषी हो या फिर सरकार। अगर सभी दोषियों को सजा एक साथ दी गई है तो फांसी भी एक साथ दी जाए। कानून इसका अधिकार देता है।’ साथ ही रेबेका जॉन ने कोर्ट में यह सवाल उठाया कि जब सभी दोषियों का डेथ वारंट एक साथ जारी किया गया तो फांसी अलग कैसे दी जा सकती है?

बता दें चारों दोषियों को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी होनी थी। लेकिन फांसी के दिन पहले ही पटियाला हाउस कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। अब तक दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी नहीं हुआ है।

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