निर्जला एकादशी: इस एक व्रत के करने से मिलता है सभी एकादशियों का पुण्य, जानिए क्या है इसका महत्व

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चैतन्य भारत न्यूज

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है निर्जला व्रत यानी पानी पिए बिना व्रत रखना। जयेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। साल में आने वाली सभी एकादशी में निर्जला एकादशी को सबसे खास माना जाता है। इस साल निर्जला एकादशी 13 जून को है। बता दें निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि अगर साल में आने वाली 24 एकादशी का व्रत न रखकर सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाए तो उस व्यक्ति को सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है।

Nirjala Ekadashi

निर्जला एकादशी का महत्व

निर्जला एकादशी को पूरे साल आने वाली सभी 24 एकादशियों में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी पर व्रत रखने से चंद्रमा द्वारा उत्पन्न हुआ नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है। साथ ही उपवास रखने से ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है।

nirjala ekadashi vrat puja vidhi

इस दिन पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति की जाती है। पूजा के दौरान ‘ओम नमोः भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करना अच्छा रहता है। एकादशी के दिन गंगा स्नान करना भी शुभ माना गया है। इस व्रत को एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है। एकादशी के व्रत को समाप्त करने की विधि को पारण भी कहते है।

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