तनाव दूर करने और अच्छे प्रदर्शन के लिए कंपनियों की पहल, काम के बाद ई-मेल के जवाब देना जरूरी नहीं

चैतन्य भारत न्यूज।

ई-मेल और फोन के माध्यम से हमेशा काम पर रहने की कार्य संस्कृति से परेशान भारतीय कंपनियों ने अब इसे गलत मानते हुए यह अहसास करना शुरू कर दिया है कि इससे बचने की जरूरत है। इसे “राइट टू डिस्कनेक्ट” का नाम दिया गया है। हालांकि भारत में इस अधिकार को मिलने में लंबा वक्त लग सकता है लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है। एक स्टार्टअप “वी वर्क” ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। वी वर्क ने कर्मचारियों के लिए एक ऐसी गाइडलाइन तैयार की है जिसके अनुसार वे शाम 7 बजे से सुबह 9 बजे तक और सप्ताहांत (वीक एंड) में आधिकारिक ई-मेल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं होंगे।

वी वर्क इंडिया की अधिकारी के मुताबिक हम हमारे कर्मचारियों को परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। हम यह भी चाहते हैं कि काम के दौरान कड़ी मेहनत करने वाले कर्मचारी अपनी हॉबी या शौक को भी वक्त दें। साथ ही हम कर्मचारियों से यह अपेक्षा रखते हैं कि वे काम के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। अधिकारी ने हालांकि यह अपेक्षा भी जताई कि यदि किसी कर्मचारी से संपर्क करना आवश्यक हो तो उसे एसएमएस, वाट्सएप मैसेज या कॉल किए जाने का विकल्प देना होगा।

गौरतलब है कि इसी साल के शुरू में एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने “राइट टू डिस्कनेक्ट” बिल भी संसद में रखा था। इसी तरह अंतराष्ट्रीय कंपनिया जैसे डेमलर और वॉक्सवेगन ने अपने कर्मचारियों के ई-मेल में ऑटो डिलिट विकल्प दिया है ताकि छुट्टियों के दिन में उनका इनबॉक्स खाली रहे और वे काम पर आते ही तनाव से न घिर जाएं।

भारत में कई कंपनियां देर तक कर्मचारियों के रुकने के खिलाफ
भारत में हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) और पीडिलाइट इंडस्ट्री जैसी कंपनियां अपने कर्मचारियों के देर तक ऑफिस में रुकने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करती हैं। एलयूएल की प्रिवेंशन ऑफ लेट वर्किंग आवर पॉलिसी के मुताबिक असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर देर तक रुकने वाले कर्मचारी को उसके मैनजर के साथ इस बारे में मेल किया जाता है ताकि वे अगले दिन टीम के माध्यम से काम का प्रबंधन ऐसा करें कि किसी को देर तक न रुकना पड़े।

पीडिलाइट इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट (एचआर) राहुल सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि हर दिन रात करीब आठ बजे हमारी टीम आफिस का मुआयना करती है कि कोई देर तक काम तो नहीं कर रहा। यदि कई दिनों तक कोई व्यक्ति देर तक काम करता पाया जाता है तो उसके रिपोर्टिंग अधिकारी से चर्चा की जाती है कि वह इस कर्मचारी पर काम के दबाव की समीक्षा करें। यदि कोई शनिवार को भी काम करना चाहता है तो उसे एचआर विभाग से विशेष अनुमति लेना होती है। पीडिलाइट अपने कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन घर से काम करने का विकल्प भी देती है।

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