मांसाहार निषेध दिवस : बेजुबान पशुओं की हत्या से बना भोजन क्यों?

चैतन्य भारत न्यूज

पशुओं की घटती संख्या को देखते हुए और उनकी रक्षा के लिए हर वर्ष 25 नवंबर को ‘मांसाहार निषेध दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन जानवरों के प्रति हिंसा के बर्ताव के प्रति संवेदनशीलता लाना और शाकाहार के प्रति लोगों को प्रेरित किया जाता है, जिससे कि एक सभ्य और बेहतर समाज का निर्माण हो सके।


शहर से लेकर गांव तक मांसाहार पर आधारित भोजन

विश्व इतिहास से लेकर आज तक हमेशा से अहिंसा जैसे विचार की पूजा होती रही है और इस विचारधारा पर चलने वाले महापुरुषों को बड़े ही सम्मान की नजर से समाज देखता है। महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों ने जहां भारत को अहिंसा के जरिए विश्व में अपनी पहचान बनाई वही उन्होंने अहिंसा के प्रति लोगों को जागरुक करते हुए उसे बेहतर मार्ग बताकर उस पर चलने के लिए प्रेरित किया। लेकिन आज भी शहर से लेकर गांव तक हर जगह मांसाहार पर लोगों का भोजन आधारित है। ऐसे भोजन के लिए करोड़ों बेजुबान निर्दोष जानवरों को अपनी बलि देनी पड़ती है। इसी के साथ अहिंसा जैसे विचार का पतन हो जाता है।

शाकाहार सबसे बेहतर भोजन

विज्ञान भी यह कहता है कि शाकाहार सबसे बेहतर भोजन है, जिससे तमाम प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है। वहीं मांसाहारी भोजन ग्रहण करने से जहां मानसिक विकार का शिकार मनुष्य आसानी से हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष 25 नवंबर को विश्व मांसाहार रहित दिवस मनाया जाता है।

आने वाली पीढ़ियों को शाकाहार के प्रति जागरुक करें

महात्मा गांधी कहते थे कि ‘स्वाद पदार्थ में नहीं, अपितु मनुष्य की अपनी जिव्हा में होता है’। न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में मांसाहार पर नियंत्रण के लिए जन-जागृति माहौल बनना ही चाहिए। हम सभी की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम आने वाली पीढ़ियों को शाकाहार के प्रति जागरुक करते हुए उसके फायदे के बारे में लोगों को बताए और उन्हें मांसाहार रहित भोजन ग्रहण करने की नसीहत दे सकें।

 

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