ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद का निधन, मौत से पहले दुनिया के लिए एक लिफाफे में छोड़ गए ‘सस्पेंस’

sultan qaboos bin said death

चैतन्य भारत न्यूज

मस्कट. ओमान (Oman) के सुल्तान काबूस बिन सईद (Sultan Qaboos bin Said) का लंबी बीमारी के बाद शुकवार शाम को 79 साल की उम्र में निधन हो गया। काबूस बिन सईद मिडल ईस्ट और अरब देशों में सबसे लंबे समय तक राज करने वाले सुल्तान रहे हैं। उन्होंने ओमान पर करीब 50 वर्षों तक राज किया। काबूस बिन सईद भले ही दुनिया छोड़कर चले गए लेकिन वो पूरी दुनिया के लिए एक ‘सस्पेंस’ छोड़ गए हैं।


एक लिफाफे में बंद ओमान की किस्मत

इस सस्पेंस की वजह वो लिफाफा है, जो काबूस बिन सईद अपने निधन से पहले छोड़कर गए हैं। कहा जा रहा है कि इसी लिफाफे में ओमान की किस्मत बंद है। ओमान के लोग अब इसी इंतजार में हैं कि कब वो लिफाफा खुले और कब उन्हें ओमान के भविष्य का पता चले। बता दें सुल्तान काबूस बिन सईद की शादी तो हुई लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं हुई। जब से उनकी तबीयत खराब चल रही थी तब से ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर सवाल उठ रहे थे। लेकिन सुल्तान ने आखिरी वक्त तक भी अपने उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की।

कैंसर से जूझ रहे थे सुल्तान 

बता दें काबूस बिन सईद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने अपना उपचार यूरोप जाकर भी करवाया लेकिन वह इस भयावह बीमारी से जंग हार गए। सुलतान को पता था कि मौत उनके बेहद करीब है बावजूद इसके उन्होंने देश को अपने उत्तराधिकारी का नाम नहीं बताया। अब वह अपने उत्तराधिकारी के नाम इसी लिफाफा छोड़ गए हैं। सुल्तान ने निर्देश दिया था कि उनके निधन के बाद ही इस लिफाफे को खोला जाए।

पीएम मोदी ने जताया दुख

सुल्तान के निधन के बाद शनिवार को ओमान में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया। सुल्तान काबूस के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘सुल्तान काबूस बिन सईद के निधन के बारे में जानकर मुझे गहरा दुख हुआ है। वह एक दूरदर्शी नेता और राजनेता थे, जिन्होंने ओमान को एक आधुनिक और समृद्ध राष्ट्र में बदल दिया। वह दुनिया के लिए शांति के प्रतीक थे।’

अपने ही पिता का तख्तापलट किया

18 नवंबर 1940 को सलालाह में जन्में काबूस बिन सईद ने 1970 में अपने पिता सईद बिन तैमूर का तख्तापलट कर ओमान की राजगद्दी संभाली थी। दरअसल, सईद बिन तैमूर बीमार और मानसिक तौर पर कमजोर हो चुके थे। लेकिन फिर भी वह अपनी राजगद्दी छोड़ने को तैयार नहीं थे। उस समय ओमान काफी पिछड़ा था। उस दौर में ब्रिटेन ने काबूस बिन सईद के उत्तराधिकार का समर्थन किया। सैद बिन तैमूर से राजगद्दी छोड़ने के लिए कहा गया। इस बात को लेकर वह इतना आक्रोशित हो गए कि उन्होंने अपनी पिस्तौल निकाल ली। कहा जाता है कि पिस्तौल निकालते समय गलती से गोली चल गई और तैमूर के पैर में जा लगी। इसके बाद वो इलाज करवाने के लिए लंदन चले गए। जहां दो साल बाद उनका निधन हो गया।

कुछ ही समय में किया ओमान का कायापलट

इसके बाद काबूस बिन सईद को राजगद्दी मिली। उन्हें ओमान की तस्वीर बदलने वाला शासक भी कहा जाता है। काबूस बिन सईद ने जिस वक्त सत्ता संभाली, तब पूरे ओमान में सिर्फ 3 स्कूल ही थे। सड़कें भी कुछ ही किलोमीटर तक बनी थी। लेकिन कुछ ही समय में काबूस बिन सईद ने ओमान का कायापलट कर दिया। काबूस बिन सईद ने ओमान के तेल और गैस के भंडारों से कमाई की।

मजबूत हुई ओमान की अर्थव्यवस्था

आज के समय में ओमान की आबादी लगभग 33 लाख है। साथ ही ओमान का नाम खाड़ी के इलाके के बेहतरीन देशों में शामिल है। शिक्षा से लेकर सामाजिक कार्यों तक ओमान ने जोरदार प्रदर्शन किया है। ओमान की अर्थव्यवस्था भी मजबूत है और देश में अमीरों की भरमार है।

ये भी पढ़े…

तेहरान : उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान क्रैश, 176 लोगों की मौत, देखें Video

कन्नौज: बस-ट्रक में जबरदस्त टक्कर के बाद लगी भीषण आग, 20 लाेगाें की जिंदा जलने से मौत, पीएम ने जताया दुख

ईरान ने ली 176 बेगुनाह लोगों की जान, कहा- यूक्रेन के विमान को धोखे से मार गिराया

Related posts