रिपोर्ट: हर 7 में से एक व्यक्ति है स्क्रीन एडिक्शन का शिकार, बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा

mobile addiction,

चैतन्य भारत न्यूज

देश में मोबाइल यूजर्स की संख्या 104 करोड़ तक जा पहुंची है। इंटरनेट के विस्तार और सोशल साइट की लत ने लोगों को मोबाइल एडिक्ट बना दिया है। यह एक ऐसा नशा है जो व्यक्ति को मदहोश नहीं करता लेकिन उसकी मनोदशा बिगाड़ देता है। यह एक मानसिक रोग बन गया है जिसे सिटिंग डिसीज का नाम दिया गया है।



एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 7 में से एक व्यक्ति स्क्रीन एडिक्शन का शिकार हो चुका है। सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने से लोगों में अकेलापन तो बढ़ ही रहा है साथ ही शारीरिक सक्रियता भी कम हो रही है। इतना ही नहीं बल्कि हाल ऐसा हो गया कि इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए देश के मानसिक अस्पतालों में एडिक्शन सेंटर खुलने शुरू हो गए।

बेंगलुरु के जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवेस्कुलर साइंस एंड रिसर्च के निदेशक और मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ सीएन मंजूनाथ ने ‘जीवनशैली से जुड़े रोग और हृदयरोग विज्ञान में ताजा प्रगति’ विषय पर अपने अध्ययन पर व्याख्यान में यह जानकारी दी।

डॉक्टर मंजूनाथ का कहना है कि, ‘अकेलापन ऐसा नहीं है कि आप अकेले रहते हैं। यह भीड़ में अकेले होने जैसा है। आज 5 से 10 सदस्यों के परिवार और दफ्तर के सदस्य स्मार्ट फोन की स्क्रीन पर चिपके रहते हैं। इससे हृदय रोग संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। दुर्भाग्य है कि फेसबुक पर तो सैकड़ों दोस्त हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में न के बराबर।’

डॉक्टर ने बताया कि, ‘बीते दो साल में हमारे अपने संस्थान में 2200 ऐसे युवा हृदय रोगियों को रजिस्टर्ड किया गया, जिनकी उम्र 35 साल से भी कम थी। इनमें से 40 फीसदी युवाओं में हृदय रोग से जुड़ा कोई भी पारंपरिक रिस्क फैक्टर नहीं था। बाद में पाया गया कि वे मोबाइल फोन और लैपटॉप एडिक्शन से इस स्थिति में आ गए हैं।’

ये भी पढ़े…

रिपोर्ट : 56% लोग बिना मोबाइल के नहीं करते जीवन की कल्पना, एक साल में 1800 घंटे फोन पर बिताते हैं भारतीय लोग

युवाओं की शक्लों को नुकसान पहुंचा रही मोबाइल फोन की लत, शोध में हुआ खुलासा

मोबाइल-लैपटॉप पर बढ़ता जा रहा बच्चों का स्क्रीन टाइम, WHO ने जताई चिंता

Related posts