आज से लग रहा है पंचक काल, जानिए क्या होता है पंचक और इस दौरान क्या सावधानियां बरतें

चैतन्य भारत न्यूज

गुरुवार यानी 11 जून से पंचक शुरू हो रहा है जो कि 15 जून तक रहेगा। मध्यरात्रि के बाद 3.40 मिनट से पंचक काल शुरू हो रहा है जोकि 15 जून मध्यरात्रि के बाद 3.18 मिनट तक जारी रहेगा। हिंदू संस्कृति में हर खास कार्य को मुहूर्त देखकर करने का विधान है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है ‘पंचक’। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भी कोई कार्य प्रारंभ किया जाता है तो उसमें शुभ मुहूर्त के साथ पंचक का भी विचार किया जाता है। पंचक काल को शुभ नहीं माना जाता है। इस समय किए गए कार्य हानिकारक फल देते हैं, अत: इस नक्षत्र का योग अशुभ माना जाता है।

क्या होता है पंचक

धनिष्ठा से रेवती तक जो 5 नक्षत्र (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती) होते हैं, उन्हे पंचक कहा जाता है। ये स्थिति हर महीने बनती है। ज्योतिष के मुहूर्तमार्तंड और चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार इन 5 दिनों में दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से धन हानि, बीमारी और नुकसान होने की संभावना बनती है। पंचक के इन 5 दिनों में विशेष संभलकर रहने की आवश्यकता होती है, अत: पंचक के दौरान कोई भी जोखिमभरा कार्य करने से बचना चाहिए। साथ ही पंचक के दौरान कोई भी शुभ काम करने से परहेज करना चाहिए।

पंचक के 5 नक्षत्रों का अशुभ प्रभाव

  1. धनिष्ठा नक्षत्र में आग लगने का भय रहता है।
  2. शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं।
  3. पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  4. उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हैं।
  5. रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना होती है।

पंचक में सावधानी

  • इन 5 दिनों में चारपाई या पलंग की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। बनवाना भी नहीं चाहिए।
  • इन 5 दिनों के दौरान जिस दिन घनिष्ठा नक्षत्र हो, उस समय घास, लकड़ी और जलने वाली चीजें इकट्ठी नहीं करना चाहिए। इससे आग
  • लगने की संभावना बढ़ जाती है।
  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ये यम की दिशा मानी गई है।
  • विद्वानों का कहना है कि इन 5 दिनों में जब चंद्रमा रेवती नक्षत्र में हो तब घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
  • इन 5 दिनों में अगर किसी का अंतिम संस्कार करना पड़े तो किसी विद्वान की सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसा न हो पाए तो शव के साथ आटे या कुश (एक प्रकार की घास) के पांच पुतले बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए। इससे पंचक दोष खत्म हो जाता है।

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