पापों से मुक्ति दिलाता है पापाकुंशा एकादशी व्रत, जानिए इसका महत्व और पूजा-विधि

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चैतन्य भारत न्यूज

पापांकुशा एकादशी का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। पापाकुंशा एकादशी व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। एकादशी तिथि का व्रत जीवों के परम लक्ष्य और भगवद भक्ति को प्राप्त करने में सहायक होता है। इस साल पापांकुशा एकादशी 9 अक्टूबर को पड़ रही है। आइए जानते हैं पापाकुंशा एकादशी व्रत का महत्व और पूजा-विधि।



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पापाकुंशा एकादशी व्रत का महत्व

पापांकुशा एकादशी के दिन गरूड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा की जाती है। मान्‍यता है कि इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से मनुष्‍य के संचित पाप नष्‍ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्‍ति होती है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं। कहा जाता है कि पापाकुंशा एकादशी सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है।

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पापाकुंशा एकादशी व्रत की पूजा-विधि

  • एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • इसके बाद घर के मंदिर या पूजा के स्‍थान पर घट की स्‍थापना करें।
  • अब घट के ऊपर भगवान विष्‍णु की प्रतिमा या चित्र रखें।
  • भगवान विष्णु को चंदन, अक्षत, मोली, फल, फूल, मेवा आदि अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जितना संभव हो जप करें।
  • पूजा के समय ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए।
  • रात्रि के समय जागरण करें और भगवान का भजन-कीर्तन करें।

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