इस कीड़े की वजह से हुई सांभर झील में 10 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत! सभी में मिले लकवे के लक्षण

sambhar lake birds

चैतन्य भारत न्यूज

जयपुर. कुछ दिन पहले ही राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास स्थित सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की अचानक मौत हो गई, जिससे हड़कंप मच गया था। अब इन पक्षियों की मौत का कारण सामने आया है। बताया जा रहा है कि सभी पक्षियों की मौत मेगट्स कीड़े के कारण हुई थी। इस कीड़े से फैलने वाली एवियन बोटुलिज्म (Avian Botulism) बीमारी को ही मौत का कारण माना जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक

गुरुवार को झील पर मामले की जांच-पड़ाल की गई। जांच के बाद विशेषज्ञों ने ‘बर्ड फ्लू’ से पक्षियों की मौत होने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद वन विभाग, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने पक्षी विशेषज्ञों के साथ मौका मुआयना किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने अब तक की वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देश दिए कि पक्षियों की मौत के कारणों की जांच कर प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही मृत पक्षियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए ताकि किसी प्रकार का संक्रमण फैलने की आशंका नहीं रहे।

10 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत होने का अनुमान

जानकारी के मुताबिक, इस त्रासदी में अब तक 10 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत होने का अनुमान है। यहां 25 प्रजातियों के पक्षी अकाल मौत का शिकार हुए हैं। इनमें नॉदर्न शावलर, पिनटेल, कॉनम टील, रूडी शेल डक, कॉमन कूट गेडवाल, रफ, ब्लैक हेडड गल, ग्रीन बी ईटर, ब्लैक शेल्डर काइट कैसपियन गल, ब्लैक विंग्ड स्टील्ट, सेंड पाइपर, मार्श सेंड पाइपर, कॉमस सेंड पाइपर, वुड सेंड पाइपर पाइड ऐबोसिट, केंटिस प्लोवर, लिटिल रिंग्स प्लोवर, लेसर सेंड प्लोवर शामिल हैं।

लकवे का शिकार हुए हैं पक्षी!

बीकानेर के अपेक्स सेंटर के प्रो. एके कटारिया ने बताया कि, पक्षियों की इन मौतों का कारण एवियन बोटुलिज्म (Avian Botulism) बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में मेगट्स को खाने से पक्षियों में लकवे के हालात बन जाते हैं और फिर पानी डूबने से मौत हो जाती है। यह बीमारी अन्य पक्षियों में भी तेजी से फैलती है। मरे हुए अधिकांश पक्षी मांसाहारी है। इससे अधिक संभावना है कि ये मेगट्स (बीमारी वाला कीड़ा) खाने के बाद लकवे का शिकार हुए हैं।

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