जिस माता या पिता को बच्चे की कस्टडी न मिली हो, उसे रोजाना बच्चे से बात करने या मिलने का अधिकार : SC

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में कार्यरत युवक और उसकी भारत में रह रही पत्नी के बीच बच्चे की कस्टडी को लेकर चल रहे केस में दो टूक नसीहत दी है।
कोर्ट ने इस मामले में कहा कि माता या पिता जिसके पास भी बच्चा न रहे उसे बच्चे से रोजाना बात करने का या उससे मिलने का हक है।



कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि, ‘जब बात दंपती के अलगाव तक पहुंचे तब मासूम बच्चों को माता-पिता दोनों का प्रेम, और संरक्षण चाहिए होता है। मां-बाप के बीच झगड़े का सबसे बुरा असर बच्चे पर पड़ता है। माता-पिता की लड़ाई के चलते उन्हें प्यार से वंचित नहीं कर सकते। बच्चे निर्जीव वस्तु नहीं है, जिन्हें इधर-उधर उछाला जाए।’

जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और कहा कि, ‘बच्चे का हित सर्वोपरि है जो किसी एक अभिभावक के साथ पूरा नहीं हो सकता। कई बार अदालतें भी बच्चे की कस्टडी पर निर्णय देते समय इन तथ्यों की अनदेखी करती हैं।’

बेटी पैदा होने के बाद शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, मई 2016 में राजस्थान की एक युवती की शादी अमेरिका में ग्रीनकार्ड पर काम कर रहे युवक से हुई थी। 2017 में दोनों की बेटी का जन्म हुआ था। इससे बेटी को अमेरिका की नागरिकता मिल गई। फिर पति-पत्नी के संबंध बिगड़ गए और पत्नी ने अमेरिका की जिला अदालत में केस दायर किया। दिसंबर 2018 तक कोर्ट ने युवक को पत्नी और बेटी का खर्च उठाने और बातचीत के जरिए बेटी की कस्टडी पर फैसला करने को कहा, लेकिन पत्नी सितंबर 2018 में ही बेटी को लेकर भारत आ गई। इसके बाद अमेरिकी कोर्ट ने बेटी की कस्टडी पिता को सौंपी और पत्नी के खिलाफ वारंट जारी किया।

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