Parents Day 2021 : ईश्वर से भी ऊंचा है माता-पिता का दर्जा, जानिए क्यों और कैसे हुई इस दिवस की शुरुआत

चैतन्य भारत न्यूज

आपने आज तक मदर्स डे, फादर्स डे के अलावा कई अन्य दिन सेलिब्रेट किए होगें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर वर्ष जुलाई महीने के आखिरी रविवार को देश समेत पूरी दुनिया में पेरेंट्स डे यानी माता-पिता दिवस मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में माता-पिता का दर्जा भगवान से भी ऊंचा माना जाता है, क्योंकि माता-पिता अपने बच्चे की परवरिश करते हुए अपनी ख्वाहिशों और जरुरतों को भी समर्पित कर देते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों का सबसे बड़ा शुभचिंतक भी माना जाता है।

कब हुई शुरुआत

पेरेंट्स डे को मनाने की शुरुआत साल 1994 में हुई थी। अमेरिका की कांग्रेस ने माता-पिता की जिम्मेदारियों को बढ़ावा देने और बच्चों के साथ संबंधों में सुधार लाने के साथ माता-पिता को सम्मान देने वाले एक बिल को यूनिफिकेशन चर्च, सीनेटर ट्रेंट लोट ने समर्थन से सीनेट में पेश किया गया। इसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने हस्ताक्षर करके हर साल जुलाई महीने के आखिरी रविवार को पेरेंट्स डे मनाने की घोषणा की। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र (UN) महासभा ने भी 212 में संकल्प ए / आरईएस / 66/292 के जरिए वैश्विक मातृ-पितृ दिवस घोषित कर दुनिया के अभिभावकों यानि पेरेंटस को सम्मानित किया।

पेरेंट्स दिवस क्यों मनाया जाता है

वैसे तो माता-पिता को सम्मान देने के लिए कोई एक दिन खास नहीं होना चाहिए। पूरे जीवन माता-पिता का ख्याल रखना चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए। लेकिन पेरेंट्स दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य माता पिता की बच्चों के जीवन में प्रतिबद्धता, पालन पोषण और पहचान बनाने में विशेष भूमिका को सम्मानित करना होता है। इसके साथ ही बच्चों और अभिभावक के बीच प्यार और समझ को बढ़ाकर परिवार में आपसी तालमेल को मजबूत करना होता है। इस दिन बच्चे अपने पेरेंटस और पेरेंटस समान लोगों को आप फूल, कार्ड्स, पेटिंग्स, गिफ्ट करते हैं।

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