संसद का मानसून सत्र शुरू, सवाल उठा- लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूरों की जान गई? सरकार बोली- हमारे पास कोई जानकारी नहीं

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के बीच आज से संसद का मानसून सत्र (monsoon session) शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, मुझे विश्वास है कि सभी सांसद मिलकर यह संदेश देंगे कि पूरा देश जवानों के साथ खड़ा है। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सहित इस साल जिन भी सासंदों का निधन हुआ है उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

कोरोना काल के कारण इस बार सदन में लिखकर सवाल जवाब किए जा रहे है। लोकसभा में विपक्ष के कई सांसदों ने सरकार से पूछा कि, लॉकडाउन के चलते देश में कितने प्रवासी मजदूरों की जान गई। जिस पर सरकार की ओर से कहा गया कि, उसके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जो बता सके कि इस दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई।

इसके अलावा सरकार से प्रवासी मजदूरों को लेकर और भी कई अहम सवाल किए गए। क्या सरकार प्रवासी मजदूरों के आंकड़े को पहचानने में गलती कर गई? क्या सरकार के पास ऐसा आंकड़ा है कि लॉकडाउन के दौरान कितने मजदूरों की मौत हुई है क्योंकि हजारों मजदूरों के मरने की बात सामने आई है? इसके अलावा सवाल पूछा गया कि क्या सरकार ने सभी राशनकार्ड धारकों को मुफ्त में राशन दिया है? अगर हां तो उसकी जानकारी दें। इसके साथ लिखित सवाल में कोरोना संकट के दौरान सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदमों की जानकारी मांगी गई।

राशन के मामले पर मंत्रालय द्वारा राज्यवार आंकड़ा उपलब्ध ना होने की बात कही गई है। लेकिन मंत्रालय ने पूरे देश में 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अतिरिक्त चावल या गेहूं, एक किलो दाल नवंबर 2020 तक देने की बात कही। इससे अलग सरकार की ओर से लॉकडाउन के वक्त गरीब कल्याण योजना, आत्मनिर्भर भारत पैकेज, EPF स्कीम जैसे लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई है।

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