संसद का शीतकालीन सत्र हुआ शुरू, कई अहम बिलों को पास कराने की कोशिश में सरकार

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू हो गया है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद, दो राज्यों में विधानसभा चुनाव होने और अयोध्या विवाद का फैसला आने के बाद यह संसद का पहला सत्र है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन के अंदर जाने से पहले मीडिया से बात की।


सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार : पीएम मोदी 

पीएम मोदी ने कहा कि, ‘ये साल 2019 का आखिरी सत्र है और बहुत महत्वपूर्ण भी है। यह राज्यसभा का 250वां सत्र है। इस सदन के माध्यम से देशवासियों के लिए भी एक जागृति का अवसर बन सकता है।’ पीएम मोदी ने कहा कि, ‘सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। मुझे उम्मीद है कि इस सत्र को सुचारू रूप से चलाने में सभी दलों का सहयोग मिलेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि, ‘संविधान देश की एकता, अखंडता और विविधता को समेटे हुए है। बीते दिनों सभी दल के नेताओं से मिलने का मौका मिला है, जैसे पिछली बार सभी दलों के सहयोग के कारण चला था, ऐसा ही इस बार भी होने की उम्मीद है।’

दिवंगत सदस्यों को दी गई श्रद्धांजलि

इस सत्र में केंद्र सरकार द्वारा सिटीजन बिल के अलावा कई अहम बिलों को पास कराने की कोशिश की जाएगी। साथ ही विपक्ष अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी समेत कई अहम मसलों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। संसद का शीतकालीन सत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की मौजूदगी में राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। लोकसभा में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिवंगत सदस्यों के बारे में सदन को सूचित किया और उन सभी को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं राज्यसभा के सभापति वैंकैया नायडू की अध्यक्षता में भी राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई। राज्यसभा में सबसे पहले दिवंगत सदस्यों को याद किया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। बता दें संसद का शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा।

इन मुद्दों पर हो सकता है हंगामा

18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलने वाले संसद सत्र में कई मुद्दों पर चर्चा होने के साथ-साथ हंगामा होने के भी आसार हैं। इनमें सबसे अहम नागरिकता संशोधन विधेयक और आर्थिक सुस्ती है। इसके अलावा विपक्ष के दल किसानों की समस्या, जेएनयू में फीस को लेकर विरोध प्रदर्शन, उन्नाव और लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला की हिरासत का मामला भी उठा सकते हैं। साथ ही कांग्रेस की मांग है कि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम को सत्र में हिस्सा लेने की इजाजत मिलनी चाहिए। ऐसे में ये मामला भी सदन में उठाया जा सकता है।

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