संसदीय समिति ने की पोक्सो एक्ट के तहत नाबालिग की उम्र 18 से घटाकर 16 साल करने की सिफारिश

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों को देखते हुए संसद की एक समिति ने केंद्र सरकार से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत बालिग होने की उम्र को 18 से घटाकर 16 कर देने की सिफारिश की। समिति का कहना है कि, गंभीर अपराधों में केंद्र सरकार को बालिग होने की उम्र को 18 से घटाकर 16 देना चाहिए।

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में सौंपी। समिति का कहना है कि, ‘यदि यौन अपराध संबंधी छोटी घटनाओं के मद्देनजर यदि अपराधी को उचित सलाह नहीं दी गई तो आगे चलकर वह गंभीर और जघन्य अपराध को अंजाम दे सकता है।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, ‘पॉक्सो एक्ट में बड़ी संख्या ऐसे मामले थे, जहां अपराधियों की उम्र कम थी। लिहाजा यह बेहद आवश्यक है कि इन प्रावधानों पर फिर से विचार किया जाए क्योंकि ऐसे अपराधों में ज्यादा नाबालिग बच्चे पकड़े जा रहे हैं।’

दो साल में बढ़े मामले

समिति ने उल्लेख किया कि, ‘पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों लगभग 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे मामले 2017 में 32,608 थे इससे बढ़कर 2019 में 47,325 हो गए। जो चिंताजनक है।’ समिति ने कहा, ‘हम सिफारिश करते है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय बालिग होने की वर्तमान उम्र 18 को घटाकर 16 करने पर समीक्षा के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय से चर्चा करे।’

क्या है पॉक्सो एक्ट

समिति की सिफारिशें अब अगले हफ्ते की शुरुआत में संसद में पेश होंगी। बता दें पॉक्सो एक्ट 2012 में लागू किया गया था। इसमें बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की जांच करने और अपराध में लिप्त पाए जाने के बाद उम्रकैद और मौत की सजा का प्रावधान किया गया था। दरअसल, अपराधी नाबालिग होने की आड़ में बड़ा अपराध कर बैठता है। यदि वह पकड़ा भी जाता है तो कानून की आड़ में बच जाता है। इसका एक उदाहरण दिल्ली चलती बस में हुआ सामूहिक दुष्कर्म था जहां 17 साल के अपराधी को नाबालिग मानकर सजा दी गई। इस घटना के बाद से ही नाबालिग की उम्र घटाने को लेकर कई समितियां काम कर रही हैं।

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