भीख मांगकर दूसरों का पेट भरते हैं दिव्यांग राजू, 100 परिवारों को दिया राशन, 22 गरीब कन्याओं की कराई शादी

चैतन्य भारत न्यूज

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में राजू नाम के शख्स का जिक्र किया। राजू पहले से ही अपने काम की वजह से चर्चा में हैं। देश में कोरोना संकट के बीच राजू ने दूसरे लोगों की मदद कर मानवता की मिसाल पेश की है। इस वजह से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजू द्वारा अच्छे कामों के बारे में पूरे देश को बताया।

100 से ज्यादा परिवारों को महीनेभर का राशन दिया

राजू पंजाब के पठानकोट के रहने वाले हैं। वह दिव्यांग हैं और भीख मांगते हैं। लेकिन राजू भीख से मिलने वाले रुपयों से दूसरे लोगों की सहायता करते हैं। उन्होंने भीख से मिलने वाले पैसों से अब तक 100 से ज्यादा परिवारों को एक महीने का राशन दिया हैं और 2500 से ज्यादा लोगों को वह मास्क भी बांट चुके हैं।

दिन भर मांगते हैं भीख फिर उसी रकम से लोगों की करते हैं मदद

राजू दिनभर व्हीलचेयर पर घूमकर भीख मांगते हैं। वह भीख के पैसों में से अपना गुजारा करने जितना रख लेते हैं और बाकि दूसरों की सहायता में लगा देते हैं। मैले-कुचैले कपड़ों में लोगों के घरों तक राशन पहुंचाने वाले राजू दिव्यांग ही नहीं स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत है। वहीं, लोगों को पता है कि उनका पैसा भलाई के कामों में लगना है तो लोग राजू को खुले दिल से पैसे भी देते हैं।

लोगों को दे रहे सामाजिक दूरी पालन करने का संदेश

राजू लोगों की मदद करने के साथ ही उन्हें घर पर रहने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए भी प्रेरित करते हैं। राजू का कहना है कि, ‘लोग बहुत पैसा देते हैं, वह पैसे जोड़ते हैं और मौका मिलते ही जरूरतमंदों पर खर्च कर देते हैं। जीते जी उसके अपनों ने उसे दूर रखा, कुछ नेकी कर लूंगा तो शायद आखिरी समय में लोगों के कंधे मिल सकें।’

बच्चों की फीस, 22 गरीब कन्याओं की शादी कराई

आप राजू की दरियादिली का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि वह समाज सेवा में बहुत दिनों से जुटे हुए हैं। राजू ने अब तक 22 गरीब कन्याओं की शादी करवाई है। इतना ही नहीं बल्कि वह गर्मियों में छबील, भंडारा भी करवाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पठानकोट के ढांगू रोड पर एक गली की पुलिया पर रोजाना हादसों से तंग आकर राजू ने अपने पैसों से इसका निर्माण करवाया। राजू हर साल 15 अगस्त पर महिलाओं को सिलाई मशीनें उपलब्ध कराते हैं। वह सर्दियों में गरीबों को कंबल भी बांटते हैं। राजू अभी कुछ बच्चों की फीस का खर्च भी उठा रहे हैं। वह उनकी कॉपी-किताब के लिए भी मदद करते हैं।

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