निर्भया केस: कोर्ट का नया डेथ वारंट जारी करने से इनकार, कहा- जब कानून जिंदा रहने की इजाजत देता है तो फांसी देना पाप

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. तिहाड़ जेल प्रशासन निर्भया के दोषियों को जल्द फांसी पर लटकाने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी करने से इनकार कर दिया।



जानकारी के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष पूरे समय इसी बात पर अड़ा हुआ था कि जब दिल्ली हाईकोर्ट दोषियों को सात दिन का समय दे चुका है तो डेथ वारंट के लिए इतनी जल्दी क्या है और सुप्रीम कोर्ट जाने की क्या जरूरत पड़ गई। इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि, ‘जब कानून दोषियों को जिंदा रहने की इजाजत देता है, तो उन्हें फांसी देना पाप होगा। केवल अटकलों और अनुमानों के आधार पर डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता है।’ साथ ही कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें दोषियों को कानूनी विकल्प के लिए 11 फरवरी तक का वक्त दिया है।

निर्भया की मां का बयान

कोर्ट के फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने नाराजगी जताई और कहा कि, ‘अदालत ने आज भी डेथ वारंट जारी नहीं किया है जबकि कोई केस लंबित नहीं था। अदालत के पास शक्ति थी और हमारे पास समय था। यह हमारे साथ अन्याय है। हम भी देखेंगे कि अदालत कब तक दोषियों को समय देती है और सरकार उन्हें समर्थन करती है…’

चारों दोषियों की अभी क्या स्थिति?

निर्भया के तीन दोषियों अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश शर्मा के दोनों विकल्प यानी क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका खत्म हो चुके हैं। अब सिर्फ पवन गुप्ता के पास क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है। इसके लिए उसके बाद 11 फरवरी तक का समय है।

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