प्रयागराज में शुरू हुआ पावन माघ मेला, स्नान करने पहुंचे लाखों श्रद्धालु

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चैतन्य भारत न्यूज

प्रयागराज. आज से पावन नगरी प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है। शुक्रवार को पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाईं।

बता दें माघ मेला 10 जनवरी 2020 से शुरू होकर 21 फरवरी महाशिवरात्रि के पर्व तक चलेगा। शुक्रवार को करीब 32 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का अनुमान है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं।



बता दें मेले का पहला स्नान आज है जबकि इसका दूसरा पावन स्नान मकर संक्रांति के दिन होगा। फिर 24 जनवरी मौनी अमावस्या का स्नान, 30 जनवरी बसंत पंचमी, 9 फरवरी माह की पूर्णिमा और अंतिम 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान होगा, जिसमें 15 से 20 लाख लोग संगम में स्नान करने के लिए आ सकते हैं। माघ मेले की भीड़ को देखते हुए शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है जबकि भारी वाहनों के रूट में भी बदलाव किया गया। दिन के समय भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। माघ मेले को मिनी कुंभ भी कहा जाता है।

श्रद्धालुओं के स्नान के लिए 6 घाटों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। इतना ही नही बल्कि सुरक्षा के मद्देनजर मेले में 13 थाने, 38 चौकियां, और 13 फायर स्टेशन बनाए गए हैं। साथ ही एटीएस और एसटीएफ की टीमें भी तैनात रहेंगी। मेले की हर गतिविधि पर 200 सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी। स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से जल पुलिस भी तैनात रहेगी।

माघ मास का है विशेष महत्व

बता दें सनातन परंपरा में माघ मास का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माघ मास में सभी देवी देवता प्रयागराज में ही निवास करते हैं। मकर संक्रांति के मौके पर संगम में स्नान और दान-धर्म का भी विशेष महत्व होता है। इस वजह से माघ मेले में बड़ी संख्या में साधु संत आते हैं और ठंड के वावजूद एक माह तक संगम की रेती पर कठिन तप और साधना करते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान

लाखों श्रद्धालु हर साल आकर संगम की रेती पर कल्पवास करते हैं। कल्पवासी एक महीने तक संगम की रेती पर बने तम्बुओं में ही रहते हैं। कल्पवासी रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करते हैं। फिर वे अपने-अपने तम्बुओं में आकर पूजा-अर्चना और भजन कीर्तन करने लगते हैं।

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