सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन कई गुना बढ़ाने दिखाई हरी झंडी

चैतन्य भारत न्यूज।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन में कई गुना बढ़ोतरी के लिए हरी झंडी दिखा दी है। कोर्ट ने मामले में ईपीएफओ की याचिका को खारिज करते हुए केरल हाई कोर्ट फैसले को बरकरार रखा है। दरअसल, हाईकोर्ट ने ईपीएफओ को ऑर्डर दिया था कि वह रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन दे। वर्तमान में, ईपीएफओ 15,000 रुपए वेतन की सीमा के साथ योगदान की गणना करता है।

12 फीसदी हिस्सा पीएफ

गौरतलब है कि कर्मचारियों के बेसिक वेतन का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ में जाता है और 12 फीसदी उसके नाम से नियोक्ता जमा करता है।

पहले थे नियम

ईपीएस की शुरुआत 1995 में की गई थी। तब नियोक्ता कर्मचारी की सैलरी का अधिकतम सालाना 6,500 (541 रुपए महीना) का 8.33 पर्सेंट ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता था। मार्च 1996 में इस नियम में बदलाव के बाद अगर कर्मचारी फुल सैलरी के हिसाब से स्कीम में योगदान देना चाहे और नियोक्ता भी राजी हो तो उसे पेंशन भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए।

2014 में बदलाव

सितंबर 2014 में ईपीएफओ ने नियम में फिर बदलाव किए। अब अधिकतम 15 हजार रुपए का 8.33% योगदान को मंजूरी मिल गई। हालांकि, इसके साथ यह नियम भी लाया गया कि अगर कोई कर्मचारी फुल सैलरी पर पेंशन लेना चाहता है तो उसकी पेंशन वाली सैलरी पिछली पांच साल की सैलरी के हिसाब से तय होगी।

अब इतनी बढ़ी पेंशन

नए नियम के बाद एक प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले व्यक्ति की पेंशन जो सिर्फ 5180 रुपए थी, फैसले के बाद 25000 रुपए हो गई।

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