MP: इस्तेमाल की गई PPE किट को नष्ट करने का दिया जिम्मा, लेकिन बायो वेस्ट प्लांट गर्म पानी में धोकर खुले बाजार में बेच रहा

चैतन्य भारत न्यूज

मध्यप्रदेश में आपदा को अवसर में बदलने के अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं। पहले कुछ लोग रेमडेसिविर इंजेक्शन की बोतल में ग्लूकोस का पानी भरकर ज्यादा दाम में बेच रहे थे और अब इस्तेमाल की हुई PPE किट को भी दोबारा बेचकर पैसा कमाने का मामला सामने आया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक बेहद शर्मनाक वीडियो सामने आया। यह वीडियो बड़खेरा बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट का है जहां सिंगल यूज PPE किट को गर्म पानी में धोकर बंडल बनाए जा रहे हैं। इसके बाद कबाड़ियों के माध्यम से सतना और भोपाल के खुले बाजार में दोबारा PPE किट के तौर पर बेचा जा रहा है। कमिश्नर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, PPE किट, ग्लव्स और मास्क को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए बड़खेरा में इंडो वाटर बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में भेजा जाता है, लेकिन प्लांट में ऐसा नहीं किया जा रहा है। यहां कर्मचारी प्लांट प्रबंधन के इशारे पर PPE किट को गर्म पानी से धोकर बाकायदा अलग बंडल बनाकर रख देते हैं। इसके बाद गोपनीय तरीके से इसे बेच दिया जाता है।

तीन विभागों की होती है जिम्मेदारी

बताया गया कि बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी प्रदूषण विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होती है, लेकिन सूत्रों की मानें तो किसी भी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी मौके पर नहीं जाते। ऐसे में बायो वेस्ट एजेंसी मनमाने तरीके से काम कर रही है।

PPE किट का न करें दोबारा इस्तेमाल

इस मामले को लेकर CMHO डॉ। अशोक कुमार अवधिया का कहना है कि, बायो वेस्ट के मामले में जो वीडियो वायरल हुआ है। उसके बारे में बायो वेस्ट एजेंसी वाले ही बता सकते हैं। हम तो बायो वेस्ट उठाने के पैसे देते हैं। जिला अस्पताल के डॉ। सीएम तिवारी का कहना है कि सिंगल यूज PPE किट इसीलिए बनाई जाती है, क्योंकि उसका दोबारा इस्तेमाल न हो। धोने से उसके रेशों का गैप बढ़ सकता है और तब यह सुरक्षित नहीं रहेगा। गर्म पानी में धोने से वायरस नष्ट हो जाता है या नहीं, इसका दावा नहीं किया जा सकता।

क्या है गाइडलाइन?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार, PPE किट, ग्लव्स और मास्क को एक बार ही इस्तेमाल करना है। साथ ही, इनको सार्वजनिक जगह पर नहीं फेंकना है, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में नष्ट कराना है।

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