बेहमई नरसंहार कांड में 39 साल बाद कल आएगा फैसला, फूलन देवी ने कतार में खड़ा कर 20 लोगों को मारी थी गोली

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. भारत के सबसे चर्चित बेहमई कांड की सुनवाई 39 साल बाद पूरी होने वाली है। इस केस का फैसला सोमवार यानी 6 जनवरी 2020 को आ सकता है। इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।



जानकारी के मुताबिक, 39 साल पहले 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में डकैत से सांसद बनी दस्यु सुंदरी फूलन देवी और उनके गिरोह ने कतार में खड़ा कर 20 लोगों की गोली मारकर सामूहिक हत्या कर दी थी। इन लोगों का नाम जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह था। इसके बाद राजाराम सिंह ने फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान फूलन समेत 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है।

साल 2012 में फूलन देवी, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। पूरे मामले पर पिछले डेढ़ महीने ले चल रही बहस कानपुर देहात के स्पेशल कोर्ट में पूरी हो गई है। इस फैसले को लेकर सरकारी वकील राजू पोरवाल काफी उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि, ‘2011 में जब ट्रायल शुरू हुआ था तब 5 आरोपी थे, जिसमे से एक आरोपी की जेल में ही मौत हो गई थी और जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन दर्ज एफआईआर में पुलिस ने चार गैंग फूलनदेवी, राम औतार, मुस्तकीम और लल्लू गैंग और 35-36 डकैतों को आरोपी बनाया था।’

राजू पोरवाल ने यह भी बताया कि, ‘आरोप पत्र दाखिल होने के बाद कभी सारे आरोपी एक साथ अदालत में हाजिर नहीं हो पाए इस वजह से ट्रायल नहीं शुरू हो पाया।’ राजू पोरवाल ने बताया कि, ‘अब चार आरोपी बचे हैं उनके लिए फैसला आने वाला है।’ डीजीसी ने बताया कि बेहमई हत्याकांड में आरोपी भीखा, श्यामबाबू व विश्वनाथ उर्फ पूतानी जमानत पर हैं। आरोपी पोसा अभी भी जेल में बंद है।

 

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