बेहद सस्ती इन 5 चीजों से अपने पितरों को करें प्रसन्न, श्राद्ध पूजा के लिए हैं सबसे जरूरी

चैतन्य भारत न्यूज

इन दिनों पितृ पक्ष चल रहे है। श्राद्ध में सभी लोग परिवार में अपने मृत परिजनों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। उनकी कृपा और आशीर्वाद हमेशा बना रहे। कहा जाता है कि पितृ पक्ष में यमराज पूर्वजों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं, इसलिए श्राद्ध व तर्पण विधि करके उनके प्रसन्न किया जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल सके। ‘

बता दें पितरों को देवताओं की तरह ही समर्थवान माना गया है। कहा जाता है कि पितरों के आशीर्वाद से सभी तरह के दुख तकलीफों से मुक्ति मिल जाती है और कभी किसी चीज की कमी नहीं होती। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष में इन पांच चीजों से उनको प्रसन्न कर सकते हैं। हम आपको कुछ ऐसी चीजें बताने जा रहे हैं, जिनसे आप ना सिर्फ पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

तिल

पितृ पक्ष में तिल का विशेष महत्व है। तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न हुआ है इसलिए यह सबसे पवित्र माना जाता है। इनसे श्राद्ध करने पर पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है। बताया जाता है कि मरने वाले व्यक्ति से अगर तिल का दान करवाया जाए तो उस दान से दानव, असुर, दैत्य आदि भाग जाते हैं।

चावल

पितरों के लिए सबसे प्रथम भोज अक्षत यानी चावल ही माना गया है। इसलिए तिल के साथ चावल का प्रयोग पितृपक्ष में किया जाता है। चावल मिलाकर ही पिंड बनाया जाता है, जिसे पायस अन्न मानते हैं। चावल के बने पिंड से पितर लंबे समय तक संतुष्ट रहते हैं और उनको किसी भोज की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए पितृपक्ष में अक्षत का विशेष महत्व है।

कुश

कुश एक घास है, जिसको हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। इसे पवित्री भी कहा जाता है। कुश का प्रयोग केवल श्राद्ध कर्म में ही नहीं बल्कि सभी पूजाओं में किया जाता है। पुराणों में बताया गया है कि कुश भगवान विष्णु के रोम से उत्पन्न हुई थी। कुश से दिया गया जल सीधे पितरों को प्राप्त होता है इसलिए श्राद्ध पक्ष में कुश का होना जरूरी माना गया है। कुश के बिना श्राद्ध किए जाने से श्राद्ध का फल नहीं मिलता है।

जल

पितरों को उनकी संतान द्वारा दिए गए जल से ही संतुष्टि मिलती है। जल ही जन्म से लेकर मोक्ष तक साथ देता है। तर्पण विधि से पितर जल्द प्रसन्न होते हैं, जिससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। हाथ में कुश और जल में काले तिल मिलाकर पितरों को तर्पण किया जाता है।

श्रद्धा

श्राद्ध में जो चीज सबसे जरूरी है वह है श्रद्धा। बिना श्रद्धा के दिया हुआ श्राद्ध, वह कभी भी पितरों को प्राप्त नहीं होता है। सारी चीजें भौतिक हैं, एक अभौतिक चीज श्रद्धा है। जिसके बिना श्राद्ध का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इसलिए श्राद्ध करते समय सबसे ज्यादा जरूरी है श्रद्धा। श्रद्धा शब्द से ही श्राद्ध बना है। श्राद्ध में अपने पूर्वजों, संस्कृति और देवों की प्रति श्रद्धा होना जरूरी है। पितृ पक्ष में जो भी कार्य करें, वह श्रद्धा के साथ करें। जिससे परिवार वालों के उपर उनकी कृपा बनी रहे।

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