रेलमंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा- कोई नहीं कर सकता रेलवे का निजीकरण, इसका कोई मतलब ही नहीं

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को संसद में यह स्पष्ट किया कि, ‘रेलवे का कोई निजीकरण कर ही नहीं सकता और इसके निजीकरण का कोई मतलब नहीं है।’ उन्होंने कहा कि, हमारी योजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) को बढ़ावा देने की है। लेकिन सरकारी संस्थानों का निजीकरण नहीं किया जा सकता है।

रेलमंत्री ने कहा, यह सच्चाई है कि, अगर हम रेलवे की सुविधाओं में सुधार चाहते हैं तो उसके लिए पूंजी की आवश्यकता है। इसलिए हमें पहले पूंजी की क्षमता बढ़ाना होगी। नरेंद्र मोदी सरकार ने नई ट्रेनों का सपना दिखाने के बजाय सुविधाएं एवं निवेश बढ़ाने के लिए पीपीपी आमंत्रित करने का इरादा किया है। इस पीपीपी मॉडल को कई प्रोजेक्ट्स में लागू किया जाएगा। गोयल ने आगे बताया कि, ‘राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए हम कुछ नए ट्रैक्स लाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स शुरू करेंगे। इसके लिए हम निवेश आमंत्रित करेंगे।’

गोयल ने कहा कि, पहले के समय में रेल बजट का इस्तेमाल पूरी तरह से राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता था। यह ऐसा बजट था जिसे राजनीतिक कारणों से तो बनाया ही जाता था और साथ ही उसका उद्देश्य देश और सांसदों को गुमराह करना भी होता था। सैकड़ों ट्रेनों और टैक्सों की घोषणा तो सिर्फ चुनाव में जीत के लिए की जाती थी। उन्होंने आगे पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि, ‘पीएम नरेंद्र मोदी ने अलग तरह के रेलवे बजट को खत्म कर दिया है। उन्होंने रेलवे को नया विजन और मिशन दिया। यूपीए के शासनकाल में रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री में एक भी कोच का उत्पादन नहीं हुआ। लेकिन बीजेपी के सत्ता में आने के बाद अगस्त 2014 में पहला कोच बना।’

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