पीएम मोदी ‘मन की बात’ : स्वस्थ रहने के लिए बच्चे पसीना बहाएं, अयोध्या पर फैसला मील का पत्थर साबित हुआ

mann ki baat

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया। बता दें आज पीएम मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 59वां संस्करण था। हर महीने के आखिरी रविवार को पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित करते हैं। पीएम मोदी ने आज एनसीसी दिवस की शुभकामनाओं से कार्यक्रम की शुरुआत की।


पीएम ने बताया एनसीसी का मतलब

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नवंबर महीने का चौथा रविवार हर साल ‘एनसीसी डे’ के रूप में मनाया जाता है। मैं भी आप ही की तरह कैडेट रहा हूं और मन से आज भी अपने आपको कैडेट मानता हूं। एनसीसी यानी नेशनल कैडेट कॉर्प्स। दुनिया के सबसे बड़े वर्दी वाले युवा संगठन में एनसीसी एक है। यह एक त्रि-सेवा संगठन है जिसमें सेना, नौ-सेना, वायुसेना तीनों ही शामिल हैं। एनसीसी का मतलब है अपने व्यवहार और अपनी आदतों में कुशल नेतृत्व, देशभक्ति, निःस्वार्थ सेवाभाव, अनुशासन कड़ी मेहनत को शामिल करना।’

‘स्वस्थ रहने के लिए बच्चे पसीना बहाएं’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘7 दिसंबर को ‘आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे’ मनाया जाता है। यह वो दिन है, जब हम अपने सशस्त्र बलों के सहयोग को याद करते हैं। हर किसी के पास उस दिन आर्म्ड फोर्सेज का फ्लैग होना ही चाहिए। हम वीर सैनिकों का स्मरण करें। लीडरशिप, देशभक्ति, सेल्फलेस सर्विस, अनुशासन और कड़ी मेहनत इन सबको अपने कैरेक्टर का हिस्सा बनाएं। अपनी आदत बनाने की एक रोमांचक यात्रा मतलब है एनसीसी।’

फिट इंडिया वीक मनाने का किया आग्रह

फिट इंडिया मूवमेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘फिट इंडिया मूवमेंट से आप परिचित हो गए होंगे। स्कूल्स फिट इंडिया मूवमेंट दिसंबर में कभी भी मना सकते हैं। इसमे बच्चे चित्रकारी, खेलकूद प्रतियोगिताएं और योग में शामिल हो सकते हैं। बच्चों को इसमें पसीना बहाना है। अधिकतम फोकस्ड एक्टिविटी करनी हैं। मैं स्कूलों से आग्रह करता हूं कि हर जगह फिट इंडिया वीक मनाएं। इससे फिटनेस के लिए जागरूकता बढ़ती है। सभी स्कूल फिट इंडिया रैंकिंग में शामिल हों और फिट इंडिया को सहज स्वभाव बनाएं। यह एक जनआंदोलन बने।’

अयोध्या पर फैसला मील का पत्थर साबित हुआ

पीएम मोदी ने आगे अयोध्या मामले पर कहा कि, ‘9 नवंबर को अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्यायपालिका के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। लोगों ने शांति और सद्भाव के मूल्यों को साबित किया। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब देश नई उम्मीदों और आकांक्षाओं के साथ नए रास्ते पर, नए इरादे लेकर चल पड़ा है। न्यू इंडिया, इसी भावना को अपनाकर शांति, एकता और सद्भावना के साथ आगे बढ़े- यही मेरी कामना है। हम सबकी कामना है। देश हित में शांति, एकता और सदभावना के मूल्य सर्वोपरि हैं। माननीय न्यायालय के फैसले को सभी देशवासियों द्वारा सम्मान और सहज, संयम और शांति से स्वीकार करना परिपक्वता का परिचय है।’

भाषाओं और बोलियों को बचाने के लिए आगे आएं

‘हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएं सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं। हालांकि, हमें इस बात की भी चिंता होती है कि कहीं भाषाएं, बोलियां खत्म तो नहीं हो जाएगी। लेकिन उत्तराखंड के धारचुला की कहानी से मुझे काफी संतोष मिला। वहां की आबादी कम है लेकिन इसके बाद भी बुजुर्ग और युवा सभी अपनी भाषाओं को बचाने के लिए आगे आए। भाषाओं और बोलियों को बचाए रखने के लिए हम भी को आगे आना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष को उन भाषाओं का वर्ष बताया है जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।’

 

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