परीक्षा पे चर्चा: पीएम मोदी ने छात्रों को दिया हौसला, माता-पिता से बच्चों पर दबाव न बनाने का किया आग्रह

pm narendra modi

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ कर रहे हैं। इसमें 25 देशों के छात्र शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र परीक्षा को लेकर अपने सीधे सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछ सकते हैं। पीएम मोदी सवालों के जवाब देंगे और चयनित छात्रों के साथ बातचीत में बताएंगे कि वे परीक्षा के तनाव को कैसे कम सकते हैं।


    • पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि, ‘फिर एक बार आपका यह दोस्त आपके बीच में है। सबसे पहले मैं आपको नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं’। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा आपके माता-पिता का बोझ थोड़ा हल्का करना चाहिए।
    • पीएम मोदी ने कहा कि, ‘स्मार्ट फोन जितना समय आपका समय चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं। तकनीक हमें खींचकर ले जाए, उससे हमें बचकर रहना चाहिए। हमारे अंदर ये भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से उपयोग करूंगा।’
    • पीएम मोदी ने कहा कि, ‘पिछली शताब्दी के आखरी कालखंड और इस शताब्दी के आरंभ कालखंड में विज्ञान और तकनीक ने जीवन को बदल दिया है। इसलिए तकनीक का भय कतई अपने जीवन में आने नहीं देना चाहिए। तकनीक को हम अपना दोस्त माने, बदलती तकनीक की हम पहले से जानकारी जुटाएं, ये जरूरी है।’
    • पीएम ने कहा कि, ‘को-करिक्यूलर एक्टिविटीज न करना आपको रोबोट की तरह बना सकता है। आप इसे बदल सकते हैं। हां, इसके लिए बेहतर समय प्रबंधन की आवश्यकता होगी। आज कई अवसर हैं और मुझे आशा है कि युवा इनका उपयोग करेंगे।’

  • पीएम मोदी ने कहा कि, ‘हमें जो शिक्षा मिलती है, वह दुनिया का द्वार है। वर्णमाला सीखते समय, बच्चे एक नई दुनिया में प्रवेश करते हैं। हमारी शिक्षा हमारे लिए नई चीजों को सीखने का एक तरीका है। हमें इसे दिनचर्या के मूल में रखने और उसके बारे में और जानने की जरूरत है।’
  • पीएम मोदी ने कहा कि, ‘जाने अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता-विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं। उसके कारण मन भी उस बात पर रहता है कि बाकी सब बाद में करूंगा, एक बार मार्क्स ले आऊं। हम विफलताओं से भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो।’
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है। शिक्षा के साथ ही दूसरी एक्टिविटी का भी महत्व है, 10वीं और 12वीं विद्यार्थियों को मैं जरूर कहूंगा कि कुछ न कुछ अलग कीजिए, सिर्फ किताबों में ही न खो जाएं।’

सवाल – बोर्ड के चलते उनका मूड ऑफ हो जाता है, तो हम किस तरह अपने आपको उत्साहित करें?
जवाब – मैं तो सोच रहा था जवानों का मूड ऑफ ही नहीं होता लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है। मुझे लगता है कि मूड ऑफ होने में बाहरी परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। आप पढ़ रहे होते हैं और मां से कहते हैं कि 6 बजे चाय चाहिए लेकिन बीच में ही आप घड़ी देख लेते हैं कि 6 बजे या नहीं तो यहीं से गड़बड़ शुरू हो जाती है। लेकिन अगर इसे दूसरे तरीके से सोचे तो ये भी मन में आना चाहिए कि मां को कुछ हुआ तो नहीं। क्योंकि आपने अपेक्षा को अपने साथ जोड़ लिया है इसलिए ऐसा होता है। हर व्यक्ति को मोटिवेशन या डिमोटिवेशन से गुजरना पड़ता है। हमें मामूली सी बात पर मूड खराब नहीं करना चाहिए।

सवाल – जो छात्र पढ़ाई में अच्छे नहीं है लेकिन खेल-संगीत में अच्छे होते हैं तो उनका भविष्य क्या होगा। पढ़ाई के बीच किस तरह एक्टिविटी के बीच बैलेंस बनाया जाए?
जवाब – शिक्षा के जरिए बहुत बड़े रास्ते का दरवाजा खोलती है। सा रे गा मा से सिर्फ संगीत की दुनिया में एंट्री मिलती है, लेकिन उससे संगीत पूरा नहीं होता है। जो हम सीख रहे हैं उसे जिंदगी की कसौटी पर कसना जरूरी। स्कूल में पढ़ाया जाता है कि कम बोलने से फायदा होता है तो हमें जिंदगी में भी उसे उतारना चाहिए। अगर आप रोबोट की तरह काम करते रहेंगे, तो सिर्फ रोबोट ही बनकर रह जाएंगे। इसलिए पढ़ाई से अलग भी एक्टविटी करनी चाहिए, हालांकि टाइम मैनेजमैंट जरूरी है।

सवाल – परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए हम कितना ध्यान केंद्रित करें। क्या सिर्फ मार्क्स से ही सफलता तय होगी?
जवाब – हम लोग अब उस दिशा में चल पड़े हैं जहां नंबर को ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अब बच्चों के दिमाग में रहता है कि पहले नंबर ले आऊं, फिर बाद में सोचेंगे। लेकिन आज दुनिया बहुत बदल चुकी है। सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं है ये सिर्फ एक पड़ाव है। नंबर ही सबकुछ नहीं हैं, बच्चों के लिए ‘ये नहीं तो कुछ नहीं’ का माहौल ना बनाएं। किसान की स्कूली शिक्षा कम होती है लेकिन वो भी नई बातें सीखता है। परीक्षा का महत्व है, लेकिन सिर्फ परीक्षा ही जिंदगी नहीं है।

  • पीएम मोदी ने चंद्रयान-2 का उदहारण देते हुए कहा कि, ‘जब चंद्रयान जा रहा था तो हर कोई जाग रहा था, जब असफल हुआ तो पूरा देश डिमोटिवेट हो गया था। जब मैं चंद्रयान लॉन्च पर था तो लोगों ने मुझे कहा था कि वहां नहीं जाना चाहिए, क्योंकि पास होना पक्का नहीं है। तो मैंने कहा कि इसलिए मुझे जाना चाहिए। चंद्रयान के जब आखिरी मिनट थे, तो वैज्ञानिकों के चेहरे पर तनाव दिख रहा है। जब चंद्रयान फेल हुआ तो मैं चैन से बैठ नहीं पाया, सोने का मन नहीं कर रहा था। हमारी टीम कमरे में चली गई थी, लेकिन बाद में मैंने सभी को बुलाया। मैंने टीम को बताया कि हम वापस बाद में जाएंगे और सभी वैज्ञानिकों को सुबह बुलाया गया। अगली सुबह सभी वैज्ञानिकों को इकट्ठा किया, उनके सपनों की बातें की। उसके बाद पूरे देश का माहौल बदल गया, ये पूरे देश ने देखा है। हम विफलता में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। अगर आप किसी चीज में असफल हुए हैं तो इसका मतलब है कि आप सफलता की ओर बढ़ चुके हैं।’

तनाव दूर करने के मकसद से शुरू हुआ है कार्यक्रम

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम छात्र तनावमुक्त होकर परीक्षा दे सके, इस मकसद से शुरू किया गया। परीक्षा पे चर्चा का पहला संस्करण 16 फरवरी, 2018 को आयोजित हुआ था। इसका दूसरा संस्करण 29 जनवरी, 2019 को हुआ था। इस बार परीक्षा पे चर्चा का तीसरा संस्करण आयोजित किया जा रहा है। छात्रों के बीच प्रधानमंत्री की परीक्षा पे चर्चा काफी लोकप्रिय रही है। यही कारण है कि पिछले दो सालों के मुकाबले 250 अधिक छात्रों ने इस बार परीक्षा पे चर्चा के लिए अपना पंजीकरण करवाया है।

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