मन की बात: पीएम मोदी ने कहा- सीखने की चाह कभी नहीं मरती, हम जिज्ञासा से कुछ नया सीखते हैं

narendra modi

चैतन्य भारत न्यूज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस साल के आखिरी मन की बात कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, ‘चार दिन बाद नया साल शुरू होने वाला है। अगले साल अगली मन की बात होगी।’ उन्होने कहा कि, ‘देश में नया सामर्थ्य पैदा हुआ है। इस नई सामर्थ्य का नाम आत्मनिर्भरता है। देश में बने खिलौनों की मांग बढ़ रही है।’

पीएम मोदी बोले, ‘इस साल कई चुनौतियां और संकट आए, लेकिन हमने नया सामर्थ्य पैदा किया है। आत्मनिर्भर भारत के लिए वर्ल्ड लेवल के प्रोडक्ट बनाना जरूरी है।’ मोदी ने मन की बात में नए साल, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पाद, वन्यजीव, युवाओं की सोच और कश्मीर के केसर जैसे कई मुद्दों पर बात की।

हम जिज्ञासा से कुछ नया सीखते हैं

हां, एक और बात मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं। कोरोना की वजह से इस साल इसकी चर्चा उतनी हो नहीं पाई है। हमें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लेना चाहिए। साथियो, इन प्रयासों के बीच, हमें ये भी सोचना है कि ये कचरा इन बीच पर, इन पहाड़ों पर, पहुंचता कैसे है? आखिर, हम में से ही कोई लोग ये कचरा वहां छोड़कर आते हैं। सामान्य सी लगने वाली प्रेरणाओं से बहुत बड़े काम भी हो जाते हैं। ऐसे ही एक युवा हैं श्रीमान प्रदीप सांगवान! गुरुग्राम के प्रदीप सांगवान 2016 से हीलिंग हिमालयाज नाम से अभियान चला रहे हैं। मेरे प्यारे देशवाशियो, अभी हम, जिज्ञासा से, कुछ नया सीखने और करने की बात कर रहे थे। नए साल पर नए संकल्पों की भी बात कर रहे थे। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो लगातार कुछ-न-कुछ नया करते रहते हैं, नए-नए संकल्पों को सिद्ध करते रहते हैं।

सीखने की चाह कभी नहीं मरती

साथियो, श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी का जीवन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है, कि, जीवन, तब तक उर्जा से भरा रहता है, जब तक जीवन में जिज्ञासा नहीं मरती है, सीखने की चाह नहीं मरती है। इसलिए, हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि हम पिछड़ गए, हम चूक गए। जिज्ञासा की ऐसी ही उर्जा का एक उदाहरण मुझे पता चला, तमिलनाडु के बुजुर्ग श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी 92 साल के हैं। वो इस उम्र में भी कंप्यूटर पर अपनी किताब लिख रहे हैं, वो भी, खुद ही टाइप करके। मेरे प्यारे देशवासियों, अभी दो दिन पहले ही गीता जयंती थी। गीता हमें, हमारे जीवन के हर संदर्भ में प्रेरणा देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, गीता इतनी अद्भुत ग्रन्थ क्यों है? वो इसलिए क्योंकि ये स्वयं भगवन श्रीकृष्ण की ही वाणी है।

सीखने की चाह कभी नहीं मरती

साथियो, श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी का जीवन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है, कि, जीवन, तब तक उर्जा से भरा रहता है, जब तक जीवन में जिज्ञासा नहीं मरती है, सीखने की चाह नहीं मरती है। इसलिए, हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए कि हम पिछड़ गए, हम चूक गए। जिज्ञासा की ऐसी ही उर्जा का एक उदाहरण मुझे पता चला, तमिलनाडु के बुजुर्ग श्री टी श्रीनिवासाचार्य स्वामी जी 92 साल के हैं। वो इस उम्र में भी कंप्यूटर पर अपनी किताब लिख रहे हैं, वो भी, खुद ही टाइप करके। मेरे प्यारे देशवासियों, अभी दो दिन पहले ही गीता जयंती थी। गीता हमें, हमारे जीवन के हर संदर्भ में प्रेरणा देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, गीता इतनी अद्भुत ग्रन्थ क्यों है? वो इसलिए क्योंकि ये स्वयं भगवन श्रीकृष्ण की ही वाणी है।

कश्मीरी केसर को मिला जीआई टैग

कश्मीरी केसर को जीआई टैग का सर्टिफिकेट मिलने के बाद दुबई के एक सुपर मार्किट में इसे लॉन्च किया गया। अब इसका निर्यात बढ़ने लगेगा। यह आत्मनिर्भर भारत बनाने के हमारे प्रयासों को और मजबूती देगा। केसर के किसानों को इससे विशेष रूप से लाभ होगा। कश्मीरी केसर वैश्विक स्तर पर एक ऐसे मसाले के रूप में प्रसिद्ध है, जिसके कई प्रकार के औषधीय गुण हैं।
कश्मीरी केसर मुख्य रूप से पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ जैसी जगहों पर उगाया जाता है। इसी साल मई में, कश्मीरी केसर को जियोग्रफाकिकल इंडीकेशन टैग यानि जीआई टैग दिया गया। इसके जरिए, हम, कश्मीरी केसर को एक ग्लोबली पॉप्युलक ब्रांड बनाना चाहते हैं। जुनून और दृढ़निश्चय ऐसी दो चीजें हैं जिनसे लोग हर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं

भारत में तेंदुओं की संख्या 60 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी

भारत ने 2014-2018 के बीच तेंदुए की आबादी में 60 प्रतिशत की वृद्धि देखी है। 2014 में, भारत में तेंदुए की आबादी लगभग 7,900 थी। यह 2019 में बढ़कर 12,852 हो गया। देश के अधिकांश हिस्सों में, विशेषकर मध्य भारत में, इनकी आबादी बढ़ गई है। मेरे प्यारे देशवासियो, अब मैं एक ऐसी बात बताने जा रहा हूं, जिससे आपको आनंद भी आएगा और गर्व भी होगा। भारत में तेंदुओं की संख्या में, 2014 से 2018 के बीच, 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
आज ही के दिन गुरु गोविंद सिंह जी की माता जी– माता गुजरी ने भी शहादत दी थी। लोग, श्री गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार के लोगों के द्वारा दी गई शहादत को बड़ी भावपूर्ण अवस्था में याद करते हैं। इस शहादत ने संपूर्ण मानवता को, देश को, नई सीख दी।

पीएम मोदी ने साहिबजादे को किया याद

लेकिन, हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई। दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन, फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए। आज के ही दिन गुरु गोविंद जी के पुत्रों, साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें। मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश में आतताइयों से, अत्याचारियों से, देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज को बचाने के लिए, कितने बड़े बलिदान दिए गए हैं, आज उन्हें याद करने का भी दिन है।

हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाए रखना है

दिल्ली एनसीआर और देश के दूसरे शहरों में ठिठुरती ठंड के बीच बेघर पशुओं की देखभाल के लिए कई लोग, बहुत कुछ कर रहे हैं। वे उन पशुओं के खाने-पीने और उनके लिए स्वेटर और बिस्तर तक का इंतजाम करते हैं।
साथियो, हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाए रखना है, बचाए रखना है, और बढ़ाते ही रहना है। मैं देश के मैन्यूफैक्चरर्स और इंडस्ट्री लीडर्स से आग्रह करता हूं: देश के लोगों ने मजबूत कदम उठाया है, मजबूत कदम आगे बढ़ाया है। वोकल फॉर लोकल ये आज घर-घर में गूंज रहा है। ऐसे में अब, यह सुनिश्चित करने का समय है, कि, हमारे प्रोडक्ट्स विश्वस्तरीय हों।

भारतीय वनक्षेत्र में हुआ इजाफा

साथियों, मैंने, तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक ह्रदयस्पर्शी प्रयास के बारे में पढ़ा। आपने भी सोशल मीडिया पर इसके विजुअल्स देखे होंगे। हम सबने इंसानों वाली व्हीलचेयर देखी है, लेकिन, कोयंबटूर की एक बेटी गायत्री ने, अपने पिताजी के साथ, एक पीड़ित कुत्ते के लिए व्हीलचेयर बना दी। आपको इन बातों की भी जानकारी होगी कि पिछले कुछ सालों में, भारत में शेरों की आबादी बढ़ी है, बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, साथ ही, भारतीय वनक्षेत्र में भी इजाफा हुआ है। इसकी वजह ये है कि सरकार ही नहीं बल्कि बहुत से लोग, सिविल सोसाइटी, कई संस्थाएं भी, हमारे पेड़-पौधों और वन्यजीवों के संरक्षण में जुटी हुई हैं।देश के अधिकतर राज्यों में, विशेषकर मध्य भारत में, तेंदुओं की संख्या बढ़ी है।

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