पीएम मोदी ने देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, ट्रैक पर किसी वस्तु को देख 50 मीटर दूर से ही लग जाएगा ब्रेक

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली मेट्रो की ‘मजेंटा लाइन’ पर देश की पहली चालकरहित ट्रेन (Driverless metro) को हरी झंडी दिखाई। पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस ट्रेन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन’ पर ‘नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ (एनसीएमसी) सेवा की भी शुरुआत की। इस कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए।


पीएम मोदी ने ड्राइवरलेस मेट्रो को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि देश में 2025 तक करीब 25 शहरों में मेट्रो चलाने का प्लान है। पीएम मोदी ने कहा कि आज से 3 साल पहले मेजेंटा लाइन की शुरुआत हुई थी, अब इसी लाइन पर ड्राइवरलेस मेट्रो की शुरुआत हो रही है। पीएम मोदी ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, ‘पहले देश में मेट्रो को लेकर कोई नीति नहीं थी, लेकिन हमने इसको लेकर तेजी से काम किया और शहरों के हिसाब से काम शुरू कर दिया। अटल जी के प्रयासों से दिल्ली को पहली मेट्रो मिली, जब हम सत्ता में आए तो सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी अब 18 शहरों में मेट्रो है। 2025 तक 25 से अधिक शहरों में मेट्रो ट्रेन होगी।’

देश की पहली ड्राइवरलेस ट्रेन दिल्ली मेट्रो के मजेंटा लाइन और पिंक लाइन पर चलाई जानी है। पहले चरण में ड्राइवरलेस ट्रेन मजेंटा लाइन पर जनकपुरी पश्चिम से नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के बीच दौड़ेगी। फिर साल 2021 में पिंक लाइन में 57 किलोमीटर तक ड्राइवरलेस मेट्रो चलाने की योजना है, जो मजलिस पार्क से शिव विहार तक की दूरी तय करेगी।

ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के फायदे

  • ड्राइवरलेस ट्रेन में एक बार में 2,280 यात्री सफर कर सकते हैं। इसमें हर कोच में 380 यात्री सवार हो सकते हैं। दिल्ली मेट्रो ने पहली बार सितंबर 2017 को इसका ट्रायल शुरू किया था।
  • ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन एक जैसी रफ्तार से चल पाएगी। इनकी टॉप स्पीड 95 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और ये पटरी पर 85 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी।
  • DMRC के मुताबिक, ये ट्रेन कम पावर पर खाएंगी।
  • ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के लिए नए वाले सिग्नल सिस्टम की वजह से दो ट्रेनों के बीच की न्यूनतम दूरी घट जाएगी और मेट्रो स्टेशन के प्लैट्फॉर्म पर ट्रेन की फ्रीक्वेंसी भी अच्छी होगी। यानी एक ट्रेन के जाने के बाद दूसरी ट्रेन के लिए यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के कारण मैनुअल गलती की संभावना कम हो जाएगी। ग्रेड ऑफ ऑटोमेशन में ड्राइवर का काम खत्म हो जाता है और ट्रेन पूरी तरह से ऑटोमेटिक तरीके से चलती है। मगर इमरजेंसी के लिए ड्राइवर ट्रेन में ही मौजूद रहता है। इसे अटेन्डेन्ट कहा जाता है।
  • इस मेट्रो ट्रेन में ड्राइवर केबिन नहीं होता है इसलिए यात्रियों के लिए थोड़ी ज्यादा जगह होगी। इसके साथ ही यात्री अब ट्रेन जाने वाली दिशा में सामने जाकर देख सकेंगे।
  • ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन में इमरजेंसी सर्विस समेत हर तरह के ऑपरेशन को रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट किया जा सकता है। 50 मीटर दूर ट्रैक पर कोई वस्तु है तो इसमें ब्रेक लग जाएगा। यानी पहले से सुरक्षित होगी।
  • ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन जिन स्टेशनों से गुजरेगी, उनके प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर लगे होंगे। सुरक्षा के लिहाज से ये स्क्रीन डोर लगाए गए हैं ताकि कोई ट्रैक पर न जा सके। यह डोर तभी खुलेंगे जब प्लेटफॉर्म पर मेट्रो ट्रेन आकर खड़ी हो जाएगी।

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