आज है रवि प्रदोष व्रत, जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और नियम

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चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष कहा जाता है। इस बार रवि प्रदोष व्रत 30 जून को पड़ रहा है। मान्यता है कि, जो व्यक्ति इस व्रत को करता है वह व्यक्ति लंबा और निरोगी जीवन प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा यह व्रत जीवन के सारे दुख, संकट दूर करके व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है। शास्त्रों के मुताबिक, हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की पूजा विधि और नियम।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय होने से पहले स्नान करें। इसके बाद साफ हल्के सफेद या गुलाबी कपड़े धारण करें।
  • सूर्योदय होने के बाद जल में शक्कर डालकर तांबे के लोटे से सूर्य देवता को अर्घ्य दें। अब इसी पानी के छींटे अपनी दोनों आंखो पर दें।
  • इस दिन भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप मन ही मन करते रहें।
  • शाम के समय भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करवाएं।
  • चावल की खीर और फल भगवान शिव को अर्पित करें।
  • पूजा करने के दौरान साफ आसन पर बैठकर ‘ॐ नमः शिवाय’ के मंत्र या पंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें।

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प्रदोष व्रत के नियम

  • घर के मंदिर को पूरी तरह साफ-सुथरा रखें।
  • काले नीले वस्त्र बिल्कुल न पहनें और साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भगवान शिव की पूजा करें।
  • व्रत के दौरान पूरे दिन कोई बुरे विचार मन में न लाएं।
  • प्रदोष व्रत के दिन गरीबों को धन या वस्त्र दान करें।

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