शरद पवार होंगे 2022 में देश के अगले राष्ट्रपति, संघ विचारक की भविष्यवाणी

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर मचे घमासान के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार से जुड़ी एक खबर सुर्खियों में है। यह खबर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा सकती है। दरअसल, संघ के एक विचारक ने यह दावा किया है कि, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बाद देश के अगले राष्ट्रपति एनसीपी प्रमुख शरद पवार होंगे।


सुप्रिया सुले भी बनेंगी कैबिनेट का हिस्सा

जानकारी के मुताबिक, यह दावा संघ विचारक दिलीप देवधर ने किया है। उन्होंने महाराष्ट्र के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि, ‘महाराष्ट्र में बनी भाजपा-एनसीपी की सरकार में शरद पवार की भी मौन सहमति है, क्योंकि, 2022 में भाजपा शरद पवार को NDA का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर तोहफा दे सकती है।’ इतना ही नहीं बल्कि दिलीप देवधर ने तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के भी जल्द ही मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनने की भविष्यवाणी की है।

भाजपा पर हमलावर नहीं रहे शरद पवार

दिलीप देवधर ने कहा कि, ‘एनसीपी के एक धड़े के साथ सरकार बनाने से संघ भी खुश है। शिवसेना के अड़ियल रवैये से संघ पदाधिकारी भी नाराज हैं। भाजपा में किसी बाहरी के आने से पार्टी के नेताओं को भले ही दिक्कत होती हो, मगर संघ अपने परिवार में बाहरियों के आने का हमेशा स्वागत करता है। वजह कि संघ को इसमें विस्तार दिखता है।’ उन्होंने यह दावा भी किया है कि, ‘आप चुनाव परिणाम के बाद शरद पवार के सभी बयानों को उठा कर देख लें, उन्होंने कभी भी अपने किसी भी बयान में बीजेपी को लेकर कोई नकारात्मकता या आक्रामकता नहीं दिखाई है।’

बिहार में जैसा हुआ, वैसा महाराष्ट्र में हो सकता है

देवधर ने कहा कि, ‘जिस तरह बिहार में राजद के साथ असहज दिख रहे नीतीश कुमार को भाजपा से मिलाने के बदले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनने का तोहफा मिला, उसी तरह शरद पवार के साथ भी ऐसा हो सकता है।’ जब दिलीप देवधर से यह पूछा गया कि यदि शरद पवार मौन सहमति दे रहे है तो उन्होंने भतीजे अजित पवार को विधायक दल के नेता के पद से क्यों हटाया? तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, गठबंधन का एक धर्म होता है और उसके पालन करने का दिखावा भी करना होता है। ये बात भी याद रखनी चाहिए कि सोनिया गांधी को इटली की बताकर शरद पवार ने ही कांग्रेस से गठबंधन तोड़ लिया था।’

शरद पवार बेहद चतुर राजनेता

इस दौरान दिलीप देवधर ने शरद पवार की सियासी चतुराई भी बताई और कहा कि, शरद पवार बेहद चतुर राजनेता हैं। वह राजनीति के पुराने खिलाड़ी है। साल 2014 में शरद पवार की पार्टी ने बीजेपी को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया था, जबकि बीजेपी ने शरद पवार से समर्थन मांगा भी नहीं था। इससे शिवसेना कमजोर पड़ गई थी। आज भी शरद पवार कुछ ऐसा नहीं कर रहे है। अंतर बस इतना है कि इस बार पर्दे के पीछे रहकर ही सारा काम हो रहा है। इस बार शरद पवार नए फॉमूर्ले के साथ राजनीति कर रहे हैं।’

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